शरीफ़ सीताफल


         
आज सीताफल का भोग लगाते लगाते खयाल आया कि यह फल थोड़ा अलग है ,देखने मै ,खाने के तरीके मै ,और उस से भी ज्यादा नाम मै स्यापा है। एक तरफ तो शरीफा और दूसरी तरफ सीताफल। सीताफल और शरीफा नाम मै ही जेंडर चेंज हो गया।

हमे तो भाई सीताफल नाम ही पसंद है ,अब सीता मैय्या से इसका क्या कनेक्शन है ,यह मुझे नहीं मालूम है। किसी ने बताया कि इसको बंदर नहीं खाते इसलिए इसका नाम सीताफल हुआ ,पर रामफल बंदर खाते है क्या ?
नाम मै क्या रखा है ? हमे तो मीठे रसीले गुदेदार सीताफल बड़े पसंद है।

भारत के लगभग सभी गरम प्रदेशों में यह बहुतायत से पैदा होता है।हमारे मध्य प्रदेश के आस्टा के सीताफल बड़े ही मीठे रसीले होते है ,हमें तो हमारी मामीजी के पापा बस सीताफल के दिनों में बड़े याद आते है ,क्योंकि वो एक बार दो बड़े टोकरे भर के सीताफल लाए थे , इधर हमारे गुजरात मै तो देवगढ़ बारिया के सीताफल विदेशो तक अपनी मिठास पंहुचा रहे है।
हैदराबाद में तो पूरी एक सीताफल मंडी ही है।जब हम हैदराबाद गए तो ,जब पता लगा कि यहां तो सीताफल मंडी है तो ,पहुंच गए सीताफल खरीदने। वहां इतने सीताफल थे कि देख कर ही बोरा गए , आनन फानन दो टोकरे खरीद लाए ,कुछ पके हुवे पर अधिकांश कच्चे   थे।बचपन मै कभी किसी पेड़ पर सीताफल कच्चा दिखता तो तोड़ लेते थे ,और फिर गेंहू मै दबा देते थे ,भूलने पर सड़े हुवे गेहूं के साथ काला कलूटा सीताफल भी मिलता था ,उस से ज्यादा मिलती थी मम्मी की डांट।खेर ,हैदराबाद मै कच्चे सीताफल को पकाने का बड़ा आसान तरीका मालूम पड़ा कि ,अखबार मै लपेट कर रख दो ,एक दो दिन मै अपने आप ही पक जाएंगे।हमने भी घर पर आ कर टाइम्स ऑफ इंडिया मै सीताफलों को लपेट दिया। चंद्रा बाबू के फोटो के नीचे दूसरे दिन ही कई सीताफल पक गए ,तो मै और मेरी बिटिया ने दसियो सीताफल उदरस्थ कर लिए ,हा वो अलग स्टोरी है कि  इतने सीताफल एक दिन मै खाने पर हमारे पेट का क्या हाल हुआ होगा।

उधर दिल्ली की तरफ सीताफल कम ही मिलते है । वाकया यह हुआ कि बेटी की एक दोस्त दिल्ली की हमारे इधर आयी ,सीताफल का मौसम था ,तो बेटी ने उसे भी खाने के लिए दिया ,तो उसका पहला प्रश्न यही था कि इसे कहा से खाना शुरू करूं ? सचमुच सीताफल खाना भी एक कला है ,तो बस कुछ नहीं जी ,सीताफल लो उसे दो भागो मै बांटो ,बड़े छोटे हिस्से हो जाए तो कोई चिंता नहीं , कोन सा जायदाद का बंटवारा हो रहा है ,दोनों हिस्से हमें ही खाने है ।एक छोटी चम्मच ले लो,अरे वही जिस से आप हलवा खाते हो ,अब करीने से चम्मच को सीताफल के छिलके के अंदर वाले भाग से स्कूप की तरह निकाल कर  इस अमृत को मुंह में घुल जाने दो ,हा इस के पहले एक अखबार बिछा लो ,क्योंकि सीताफल मै कचरा बड़ा निकलता है ।भूल से भी बीज न निगल जाना ,वरना कुछ दिन मै सीताफल का पेड़ आप मै उग आएगा ।

सीताफल को फल की तरह ही खाने का अलग ही मजा है ,आजकल तो सीताफल रबड़ी ,सीताफल आइस क्रीम और भी कई चीजें बनने लगी है,ये भी मिलती है तो मजे से खा ही लेते है पर फल खाने का मजा अलग है।
इस मै केल्शियम,मैग्नीशियम ज़िंक, आयरन और भी कई मिनरल्स और विटामिन है जो मेंडेलीफ की पिरियोडिक टेबल से टेली कर सकते है।

तो लाओ ना खरीद कर सीताफल। पर अगर आप उत्तर प्रदेश मै है तो सीताफल मांगने पर आप को कद्दू मिलेगा । कद्दू को सीताफल कहना तो सीताफल की तौहीन है ,पर वही की नाम मै क्या रखा है , शराफ़त से शरीफा खरीद लाओ और इस के मीठे मक्खन का मजा लो।

और अगर आप के यहां के सीताफल प्रसिद्ध है अपनी मिठास के लिए तो एक टोकरा इधर भेजना न भूले ।

मेरी कलम से ✍️

उषा.....