Statue Of Unity

भारत के पर्यटन मानचित्र पर वर्तमान समय मैं सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल गुजरात के राजपिपला मै स्थित statue of unity है ,जो पिछले वर्ष 31 ओक्टुबर को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आम जनता के दर्शनार्थ उद्घाटित किया गया है।

Statue of unity भारत के लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित है , जो नर्मदा नदी के साधु बेट द्वीप पर केवड़िया कालोनी के पास सरदार सरोवर बाँध के पास स्थित है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया , विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा 182 मीटर , जिसे लारसन एंड टूब्रो कम्पनी ने 42 महीने के रिकार्ड टाइम मैं बनाया , कुल लागत 2989 करोड़ के आसपास आयी है , जिस मैं सम्पूर्ण भारत भर से लोहा इकट्ठा किया गया , हालाँकि इस लोहे का उपयोग प्रतिमा मैं ना कर के अन्य निर्माण कार्यों मैं हुवा है। सबसे पहले लोहा झारखंड के एक किसान ने दान मैं दिया था।  

डिज़ाइन निर्माण 

सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह ब्रांज़ की प्रतिमा चीन मैं तैयार हुई है , और इसका डिज़ाइन पद्म भूषण मूर्तिकार श्री राम वनजी सुथार ने तैयार किया है , उन्होंने पचास से अधिक मूर्तियाँ बनायी है , जो देश के कई भागो मैं स्थापित है इस को बनाने मैं उनके बेटे अनिल सुथार का भी बराबर योगदान है

प्रतिमा की ऊँचाई आधार से 240 मीटर है , ज़मीन से आधार की ऊँचाई 58 मीटर है , प्रतिमा की ऊँचाई 182 मीटर है।


गेलरी संग्राहलय 

प्रतिमा को आसपास के स्थान को पाँच ज़ोन मैं बाँटा गया है , जिस मैं अभी तीन ज़ोन ही खुले है। पहले लेवल पर एक संग्राहलय है जिस मैं सरदार पटेल के योगदान की झाँकिया मूर्तियाँ है , एक सेल्फ़ी ज़ोन है , ऑडीओ विडीयो प्रदर्शन है ज़ोन दो प्रतिमा के मध्य भाग तक है ,ऊँचाई 149 मीटर है , यहाँ पर गेलरी है , ज़ोन तीन से नर्मदा दर्शन सतपुरा विंध्याचल की मनोहारी चोटियों की अनुपम छटा दिखाई देती है। ज़ोन 4 5 दर्शकों के लिए नहीं है , वह रख रखाव से सम्बंधित है।

लोकेशन

यह वडोदरा से 100 km दूर है , अहमदाबाद से 200 km , सूरत से 155 km , मुंबई से 420 km है यहाँ पर यातायात के कई साधनो से आसानी से पहुँचा जा सकता है। स्टेट हाईवे 11 63 से सड़क मार्ग से जाना होता है। सब से नज़दीक क़स्बा केवड़िया है जो नर्मदा जिले मैं आता है , 25 km की दूरी पर राजपीपला ज़िला है। मुख्य सड़क से 3.5 km की दूरी पर प्रतिमा स्थित है , जहाँ पर एक पुल के ज़रिए पहुँचा जाता है। सबसे पास का हवाई अड्डा वडोदरा मैं है , जहाँ से टेक्सी ले कर आसानी से पहुँचा जा सकता है , सब से नज़दीकी रेलवे स्टेशन भी वडोदरा है।

होटल

राज पीपला मैं कई होटल रिज़ॉर्ट है। श्रेस्ठ भारत भवन एक तीन सितारा होटल है जो बिलकुल पास ही स्थित है इसके अलावा एक टेंट सिटी भी है , जिस मैं 250 से अधिक सर्व सुविधा युक्त टेंट है , जिस मैं नर्मदा के किनारे रात बिताने का अनुपम आनंद लिया जा सकता है।

टिकिट बुकिंग 

सोमवार के दिन बंद रहता है। बाक़ी सप्ताह के अन्य दिनो मैं 9 से 5 तक खुला रहता है टिकिट खिड़की पर टिकिट सवेरे 8 से ले कर शाम के 4 बजे तक ही टिकिट मिलती है। आख़री एंट्री पाँच बजे तक होती है। 
ऑनलाइन टिकिट बुकिंग होती है SOU online ticket booking से सीधे टिकिट बुक हो जाती है , टिकिट दो तरह की है पहली टिकिट 180 की है जिस मैं बस किराया , स्टेचु, वेलि ओफ फ़्लावर्ज़ , मेमोरियल, संग्राहलाय , SOU साइट और सरदार सरोवर डेम का भ्रमण शामिल है।

दूसरी टिकिट 350 rs की है जिस मैं प्रतिमा के भीतर 35 फ़्लोर तक लिफ़्ट के माध्यम से जा कर अंदर की गेलरी नर्मदा का विहंगम द्रश्य दिखाई देता है , वह शामिल है , बाक़ी अन्य सभी जो पहले टिकिट मैं है वो सभी जगह शामिल है।

हर पाँच मिनिट के अंतराल पर बसें उपलब्ध है , हर जगह साइन बोर्ड है , गाइड है , सुरक्षा व्यवस्था बेहद चुस्त है। अति आधुनिक प्रसाधन व्यवस्था हर जगह उपलब्ध है।

फ़ूड कोर्ट है , बेठने की अच्छी व्यवस्था है पार्किंग एरिया बहुत बड़ा है।

वेलि ओफ फ़्लावर्ज़ दर्शनीय है , बहुत बड़े भूभाग मैं स्थित है , जहाँ कई सो प्रकार के रंग बिरंगे फूल है , फ़ोटोग्राफ़ी के लिए आदर्श जगह है।

सरदार सरोवर डेम भी देखने लायक है , विशेष रूप से बरसात के दिनो मैं  

रोचक तथ्य

जितनी प्रतिमा की ऊँचाई है , उतनी ही गुजरात विधानसभा मैं सीटें है, 182 मीटर ऊँचाई , 182 सीट 

प्रतिमा मैं 1700 टन की ब्रॉंज़ प्लेट्स का इस्तेमाल हुवा है।

प्रतिमा 130 km प्रति घंटे की हवा का दवाब सहन कर सकती है , और 6.5 रिक्टर स्केल भूकम्प के झटकें सहन कर सकती है।

प्रतिमा के अंदर अति तीव्र गति से चलने वाली लिफ़्ट है , जो प्रतिमा के पेरों से गेलरी तक 26 लोगों को केवल 30 सेकंड मैं पहुँचा देती है ( 153 मीटर )

गेलरी मैं एक साथ 200 लोग अवलोकन कर सकते है।

अलग से सेल्फ़ी लवर्स के लिए सेल्फ़ी ज़ोन बनाया गया है।

5700 मेट्रिक टन लोहा और , 18500 मेट्रिक टन लोहे की छड़ों का प्रतिमा बनाने मैं उपयोग हुवा है।

प्रतिमा के बनने से आस पास के 15000 वन वासी लोगों को रोज़गार उलब्ध हुवा।

लारसन एंड टूब्रो कम्पनी को 25 वर्ष के लिए रख रखाव की ज़िम्मेदारी मिली है|


दो दिन के यात्रा आयोजन मैं पूरे क्षेत्र का पर्यटन किया जा सकता है।

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usha jain bhatnagar 
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