प्यार और ज्योतिषिय द्रष्टिकोण





मौसम बसंत का है साथ ही valentine day आने वाला है तो ज्योतिष के माध्यम से भी प्यार की बात की जाए
प्यार मैं अधिकांश लोगों को असफलता ही हाथ लगती है बहुत ही कम भाग्यशाली लोगों को सफलता मिलती है
जन्म कुंडली मैं बहुत ही स्पस्ट संकेत होते है की आपको सफलता मिलेगी या निराशा हाथ लगेगी।

कुंडली मैं प्रेम के लिए दो ग्रह ज़िम्मेदार है एक चंद्र और दूसरा शुक्र चंद्र मन का कारक और शुक्र ह्रदय की धड़कन।

तीसरा ग्रह मंगल उसका मज़बूत होना बेहद ज़रूरी है तभी प्यार के लिए कुछ कर गुज़रने का साहस मिलेगा

जिन जातकों की कुंडली मैं मंगल शुक्र की व्रषभ राशि या तुला राशि मैं हो या शुक्र मंगल की मेष राशि या व्रस्चिक राशि मैं हो या जातक की तुला या व्रषभ राशि हो इन लोगों के जीवन मैं प्रेम निस्चित रूप से आता है
 अर्थात् कुंडली मैं मंगल के आगे   2.  या  7 लिखा हो या शुक्र के आगे 1  या 8 लिखा हो या चंद्र के आगे 2.  या 7 लिखा हो।

शुक्र मंगल की युती मैग्नेटिक होती है ,व्रषभ या तुला राशि के जातकों मैं ग़ज़ब का आकर्षण होता है इन लोगों का प्रेम मैं पड़ना निस्चित है।

कुंडली मैं शुक्र मंगल की युती हो शुक्र चंद्र साथ हो या शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो तो तय मानिए जीवन मैं प्रेम की बसंत बहार आना निस्चित है

फ़ोटो गूगल से साभार 

ब्लॉगर 
उषा जैन भटनागर 


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