श्री कृष्ण

                                 
कर्षति आकर्षति इति : कृष्ण

भगवन श्रीकृष्ण का जन्म आनंद ही नहीं परमानन्द है
कृष्ण हर रूप मै आकर्षित  करते है बाल  रूप हो,या गोपियों के साथ युवास्था या गीता का उपदेश देते हुवे
एक स्वाभाविक प्रश्न  सभी के मन मै उठता है मानव हो कर महामानव ,सर्वपूजित कैसे बने ज्योतिषियों के लिए यह एक गहन अध्यन व् चुनौती का विषय है
भगवन श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद  वदी  अस्टमी की मध्य रात्रि को हुवा वृषभ लग्नमै  जन्म होने से चुंबकीय व्यक्त्तिव के स्वामी रहे ,लग्नेश शुक्र अत्यंत मनोहारी , आकर्षक लोकप्रिय व्यक्त्तिव बनाता है
कुंडली मै  कई अद्भुत योग एक साथ होने से उन्हें एक विराट व्यक्तिय्व देता है  गज केसरी योग,नीच भंग  राज योग व् परिवर्तन योग एक साथ एक ही कुंडली मै अदभुत संयोग

चौथे भावमै स्वग्रही  सूर्य गुरु के साथ विराजमान है ,केंद्रमै  स्थित गुरु गज केसरी योग का निर्माण कर रहा है जो वैभवी राजा के सामान जीवन का प्रतिक है
मंगल कर्क राशि मै  अर्थात नीच राशि मै  परन्तु राशि का स्वामी चन्द्र उच्च वृषभ राशि मै  स्थित है जी नीच भंग राजयोग का निर्माण कर रहा है,यह योग राजा बनाता है व् संसार मै  उपलब्ध समस्त सुखो को भोगने वाला बनता है

शुक्र व् चन्द्र के बीच परिवर्तन योग है शुक्र चन्द्र की कर्क राशि मै  व् चन्द्र शुक्र की वृषभ राशि मैं  स्थित है परिवर्तन योग अजेय ,नीतिकारक व् विदेशवासी बनता है

केंद्र मै  चतुर्थ भाव मै गुरु सूर्य के साथ होने से मित्रता का जीवन मै  सर्वोच्च स्थान है ,साथ ही गीता का महान ग्ज्ञान ,नीतिपरक व् उपदेशपरक बना रहा है
पंचम भाव मै  स्वग्रही बुध अत्यंत   वाक्पटु संवेदनशील  ,कुशल व्यपस्थापक व्  अत्यंत बुद्धिमान बना रहा है

राहु पराक्रम भाव मै  मंगल के साथ  स्थित होने से महाभारत के युद्ध का कारण  बन रहा है
जीवन के सभी घटनाक्रम दशा महादशा मै  सटीक रूप से घटित हुवे है
ऐसे श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव  पर सभी को हार्दिक बधाई

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