नौकरी के लिए ज्योतिषिय द्रष्टिकोण

पढ़ाई समाप्त होते ही युवा वर्ग के सामने एक यक्ष प्रश्न होता है , नौकरी मिलेगी या नहीं , मिलेगी तो कब , कैसे और कहाँ मिलेगी ।
जो नौकरी पेशा है उन्हें , पद्दोन्नती व स्थान्तरण की चिंता सताती रहती है ।
कुंडली मैं कई ग्रहों व योगों के माध्यम से यह जाना जा सकता है की कब नौकरी मिलेगी , किस क्षेत्र मैं सफलता मिलेगी , या नौकरी मैं स्थायित्व रहेगा या नहीं ।

                                                                                                                     

नौकरी के लिए मुख्यतः 2, 6,8,10,11 स्थानो का कुंडली मैं अध्यन किया जाता है
यदि कुंडली मैं छठा स्थान बलवान व शुभ ग्रहों से द्रस्ट हो तो नौकरी के लिए अनुकूल स्थिति मानी जाएगी , यदि छठे स्थान का मालिक ग्रह दूसरे या ग्यारहवे स्थान मैं हो तो अच्छी स्थिति मानी जाएगी , इसी के साथ दूसरे स्थान का अध्यन करना भी ज़रूरी है , यदि दूसरा स्थान निर्बल है या अशुभ ग्रहों से द्रस्ट है तो ऐसे जातकों को योग्यता व मेहनत के अनुरूप नौकरी व पैसा नहीं मिलेगा , इसी प्रकार दशम भाव भी नौकरी व कार्य के लिए देखा जाता है , अगर दशम स्थान मैं मज़बूत ग्रह है व शुभ ग्रहों से द्रस्ट है तो कार्य क्षेत्र मैं अच्छी स्थिति रहेगी साथ ही वरीस्ठ अधिकारियों से अच्छे सम्बंध रहेंगे व लाभ प्राप्त होगा ।
अगर दशम भाव मैं निर्बल ग्रह है तो उच्च अधिकारियों से विवाद रहेगा ।
यदि ग्यारवहे भाव मैं मतलब लाभ भाव मैं यदि शुभ ग्रह है तो नौकरी से अच्छी आय प्राप्त होगी ।
इसी के साथ यह जानना भी ज़रूरी है की प्रतियोगी परीक्षा मैं सफलता प्राप्त होगी या नहीं , या कब होगी , इसके लिए कुंडली मैं 1, 3,5,6 और 10 वे स्थान का अध्यन किया जाता है ।
प्रथम स्थान मतलब लग्न स्थान इसी स्थान से व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ का अध्यन किया जाता है , तीसरा स्थान से कितनी मेहनत कर पाएगा व कितना साहस दिखा सकता है यह जाना जा सकता है , पंचम भाव से अभ्यास व बुद्धिमत्ता जानी जाती है , छठा भाव नौकरी व प्रतियोगी परीक्षा के लिए देखा जाता है , दशम भाव कार्य भाव है इससे किस क्षेत्र मैं कितनी सफलता मिलेगी यह जाना जा सकता है ।
Administration मैं जाने के लिए सूर्य , गुरु , शनि ,मंगल व राहु की स्थिति मज़बूत होनी चाहिए , सूर्य सरकारी नौकरी दर्शाता है , गुरु ज्ञान दर्शाता है ,ये दोनो ग्रह उच्च पद दर्शाते है , मंगल व्यक्ति की हिम्मत , ताक़त व निर्णय शक्ति दर्शाता है , शनि मेहनत व न्याय को दर्शाता है ।
यदि कुंडली मैं यह सभी ग्रह शुभ व उच्च अवस्था मैं है तो व्यक्ति उच्च पद को प्राप्त करता है ।
गुरु अगर शुभ व उच्च का है तो किसी शेक्षणिक़ संस्था मैं या management या HR मैं उच्च स्थान प्राप्त करता है ।
यदि बुध कुंडली मैं निर्बल है तो व्यक्ति अपनी बात को अच्छी तरह से रख नहीं पाएगा ।
यदि शनि , मंगल , राहु व केतु इनमै से कोई ग्रह जब त्रतिय भाव मैं होता है तब व्यक्ति शुरुवात मैं नौकरी करता है व बाद मैं स्वयं का व्यवसाय करता है ये ख़ास तोर पर उन लोगों के साथ देखा जाता है जब शनि तीसरे भाव मैं हो ।
इसके अलावा कई योग जैसे राज योग , धन योग , गज़ केसरी योग व बुधादित्य योग हो तो भी उच्च स्थान प्राप्त होता है ग्रहो के भ्रमण भी नौकरी व पदोन्नति व स्थान्तरन की जानकारी देते है ।
गोचर के ग्रह कई अवसर प्रदान करते है , ज़रूरत है उचित समय को जानने की व उसके अनुरूप कार्य करने की । फिर भी  कुंडली के सम्पूर्ण अध्यन से पूरी जानकारी प्राप्त होती है ।




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