विवाह मैं विलम्ब

विवाह मैं विलम्ब - ज़्योतिषय दृष्टिकोण

पुराने समय मैं बाल विवाह का प्रचलन था , समय के साथ विवाह योग्य उम्र बढ़ती चली गयी ,लेकिन कई बार ऐसा होता है की एक उचित उम्र होने के बाद भी विवाह नहीं हो पता है , तब माता पिता की परेशनिया बढ़ जाती है ।
इस स्थिति मैं ज्योतिष परामर्श आवश्यक हो जाता है । 
लग्न कुंडली व नवमांश कुंडली के अध्यन से विवाह का उपयुक्त समय जाना जा सकता है ।

लग्न जीवन मतलब कुंडली का सातवाँ स्थान , अगर इस स्थान पर शुभ ग्रह गुरु या शुक्र हो या इनकी दृष्टि हो या कोई सम्बंध हो तो विवाह शुभ व जल्दी होगा , लेकिन यहाँ अगर शनि स्थित है तो विवाह मैं अवश्य विलम्ब होगा ।

यदि  शनि सप्तमेश का स्वामी बन कर लग्न मैं हो तब भी विवाह मैं विलम्ब होगा ।

सप्तमेश मंगल है तो माँगलिक कुंडली होने से विवाह सामान्य तोर पर 28 वर्ष पस्चात ही होता है ।

यदि शुक्र अस्त है या नीच राशि का है तब भी विवाह मैं विलम्ब होता हैं ।

गुरु दुर्बल है या नीच राशि का है तब भी विवाह मैं विलम्ब होता है ।

6,8,12 मैं स्थित राशि का स्वामी अगर सप्तम  मैं और किसी ग्रह की शुभ दृष्टि भी ना हो तो विवाह अवश्य देर से होता है

शनि या मंगल का अगर सप्तम स्थान से कोई सम्बंध हो तब भी विवाह मैं मुश्किलें आती है ।

यदि सप्तमेश का स्वामी नीच राशि मैं हो अस्त हो या कम अंश का हो तब भी विवाह मैं विलम्ब होता है ।

यदि कुंडली मैं मंगल शुभ स्थिति मैं ना हो और दशा या अंतर्दशा मैं हो तब भी विवाह मैं विध्न आते है ।

इन सभी योगों से विवाह का समय जाना जा सकता है , लेकिन वेवाहिक जीवन सुखपूर्ण होगा या नहीं , यह कुंडली के सम्पूर्ण अध्यन से ही पता लगेगा ।


ज्योतिषाचार्य उषा जैन भटनागर
www.ushaastroworld.com

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