शनि का वक्रि भ्रमण


वर्तमान मैं शनि का भ्रमण धनु राशि मैं चल रहा है परंतु तारीख़ 20 जून 2017 को धनु राशि से वक्र भ्रमण करते हुवे व्रस्चिक राशि मैं प्रवेश करेगा । जो 26 ऑक्टोबर 2017 को वापस मार्गी हो कर धनु राशि मैं प्रवेश कर जाएगा ।
व्रस्चिक राशि शनि के शत्रु मंगल की राशि है ।
शनि का व्रस्चिक राशि मैं प्रवेश होने से सिंह राशि पर लघु पनोती लग जाएगी जो मानसिक अशांति व अन्य कई छोटी परेशनिया पैदा करेगी ।
सबसे ज़्यादा असर मेष राशि के  जातकों पर पड़ेगा पनोती के साथ शनि अस्टमेश मैं प्रवेश करेगा , वर्तमान मैं गुरु भी मेष राशि के जातकों के षस्ट मैं भ्रमण कर रहा है , जो रोग , ऋण व शत्रु का घर है ।
शारीरिक व आर्थिक क़स्ट रहेगा व शत्रु पक्ष प्रबल रहेगा ।
धनु राशि के जातकों पर भी पनोती का असर रहेगा , आकस्मिक व अनुपयोगि व्यय , चिंता व भ्रमण होगा । यात्रा मैं सावधानी आवश्यक है ।
कुम्भ राशि के जातकों के लिए भी यह वक्रि भ्रमण शुभ नहीं होगा , व्यापार मैं नुक़सान की सम्भावना , व नौकरिपेशा वर्ग को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है ।
तुला व व्रस्चिक राशि के जातकों के लिए भी यह समय शुभ नहीं कहा जा सकता है , संयम रखे व शुभ समय की प्रतीक्षा करे ।
लेकिन कन्या राशि के जातकों के लिए यह पनोती अत्यंत लाभदायक रह सकती है , नाम प्रतिस्ठा मैं व्रद्धि होगी , आर्थिक समस्या दूर होगी , हर प्रकार से शुभ समय रहेगा ।
यह 128 दिन का समय सभी राशि के जातकों पर कम या अधिक मात्रा मैं प्रभाव अवश्य डालेगा अतः , धेर्य रखे व शुभ समय की प्रतीक्षा करे ।
शनि का यह वक्रि भ्रमण मौसम पर भी अपना प्रभाव डालेगा , अति वर्षा , भूकंप, दुर्घटनाओं की सम्भावना अधिक रहेगी ।
इस 128 दिनो के समयकाल मैं फिर से कोई अप्रत्याशित निर्णय या घटना घटित हो सकती है ।
हालाँकि यह एक छोटा समय ही है फिर भी जो जातक जिनका जन्म 15 ऑगस्ट से 15 सेप्टेम्बर के मध्य , 15 नोवेम्बर से 15 डिसेम्बर के मध्य या 15 मई से 15 जून के मध्य हुवा है उनको मानसिक परेशानी व कई छोटी मोटी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा , आर्थिक व शारीरिक तकलीफ़ हो सकती है
.

शनि मंत्र का जाप व हनुमानजी की उपासना व दर्शन से लाभ होगा ।


फ़ोटो गूगल से साभार 

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