South west direction

साउथ वेस्ट ( दक्षिण पस्चिम ) दिशा

• साउथ वेस्ट ( दक्षिण पस्चिम ) दिशा जैसे नैऋतय  कहा जाता है का स्वामी राहु है , यदि घर मैं यह दिशा ख़ाली है या कोई गड्ढा है या कोई काँटेदार पेड़ है तो ग्रह स्वामी हमेशा बीमार रहेगा या शत्रुओं से पीड़ित रहेगा या क़र्ज़ से पीड़ित रहेगा
 •ये दिशा हमेशा भारी रहना चाहिए , अगर जगह ख़ाली है तो हमेशा आर्थिक तंगी रहेगी ।
  •यदि इस दिशा मैं रसोई घर है तो पति पत्नी मैं अन बन रहेगी , महिलाओं को पेट सम्बंधी परेशनिया रहेगी ।
 • अगर इस दिशा मैं कोई पानी का स्त्रोत है तो राहु + चंद्रमा का प्रभाव है , मानसिक रोगों से पीड़ित रहेंगे , व हमेशा भयग्रस्त रहेंगे ।
 • यदि इस दिशा की दीवार टूटी हुई या दरारों वाली है तो घर का कोई ना कोई व्यक्ति अवश्य ही प्रेत बाधा से पीड़ित हो सकता है ।
 • ईशान की अपेक्षा यह भाग निम्न हो मतलब अगर ढलान इस दिशा की और हो तो शत्रु बढ़ेंगे , पड़ोसियों से सम्बंध अच्छे नहीं रहेंगे ।
 • यदि इस दिशा मैं स्नान ग्रह है तो ग्रह स्वामी की कुंडली मैं मंगल और राहु का दुस्प्रभाव रहेगा और उसे जीवन मैं कई बार प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा ।
 • नेऋतय दिशा वाले ग्रहों के लिए दक्षिण पस्चिम मैं उत्तर पूर्व की अपेक्षा अधिक ख़ाली भाग हो यदि दक्षिण भाग मैं अधिक हो तो घर की स्त्रियों के लिए व पस्चिम भाग अधिक ख़ाली हो तो पुरुष सदस्य अल्पायु होते है और ऐसे घर पराधिन हो जाते है ।
 • फाटक एक ही दिशा मुखी होना चाहिए या तो दक्षिण दिशा मैं या पस्चिम दिशा मैं । अगर दोनो दिशाओं मैं द्वार होगा तो घर के सदस्यों के मध्य शत्रुता बढ़ेगी ।
 • नेऋतय कक्ष को शयन कक्ष या भंडार ग्रह के रूप मैं इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन स्नान ग्रह के रूप मैं कभी भी नहीं
• अगर ये दिशा आगे को निकली हुई है तो शत्रु , क़ानूनी पचड़े व क़र्ज़ सम्बंधी परेशनिया बनी रहेगी ।

समाधान
अगर घर मैं यह दिशा दूषित है तो घर के पूजाघर मैं राहु यंत्र की स्थापना करे ।
घर के आस पास पानी जमा ना होने दे ।
घर के सभी पानी के निकास अच्छी तरह कार्य कर रहे हो उनमै कोई रुकावट ना हो ये व्यवस्था करे ।
घर के मुख्य द्वार पर भूरे या मिश्रित रंग के गणपति की प्रतिमा या चित्र लगाए ।


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