अक्षय तृतीया

                       
अक्षय तृतीया या हमारी मालवी मैं आखा तीज वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते है । अक्षय तृतीया 7 मई 2019 को आ रही है।
अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप मैं जाना जाता है इस दिन बगेर मुहूर्त देखे जो भी कार्य किया जाता है व शुभ होता है । अक्षय मतलब जिसका क्षय नहीं होता है जो कभी ख़त्म ना हो । इस दिन विवाह , ग्रह प्रवेश , आभूषण ख़रीददारी आदि शुभ होते है ।
भविष्य पुराण के अनुसार सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ इसी तिथि को हुवा था । नर नारायण , हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण इसी तिथि को हुवा था ।
इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुवा था व इसी के साथ द्रापर युग का समापन भी हुवा था ।
बदरिनाथ मैं कपाट इसी तिथि को खुलते है , और वृंदावन मैं बाँके बिहारी के चरण कमल के दर्शन इसी दिन होते है , अन्यथा पूरे वर्ष विग्रह वस्त्रों से ढँके होते है ।
स्कन्द पुराण व भविष्य पुराण मैं बताया गया है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुवा था ।
इसके अतिरिक्त अन्य कई जन श्रुतियाँ प्रचलित है ।

जैन धर्म मैं अक्षय तृतीया 

जैन धर्मावलंबियों के लिए इस दिन का अत्यधिक महत्व है । इसी दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ देव भगवान ने   लगभग 400 दिन की तपस्या के बाद पारणा किया था , अतः जैन धर्म मैं इसे वर्षी तप कहा जाता है ।
भगवान आदिनाथ भौतिक व पारिवारिक सुखों का त्याग कर सत्य व अहिंसा का प्रचार करते हुवे हस्तिनापुर पंहुचे , तब वहाँ उनके पोत्र सोमयश का शासन था , सम्पूर्ण नगर दर्शन के लिए उमड़ा तब सोमयश के पुत्र श्रेयांश कुमार ने प्रभु आदिनाथ को पहचान लिया व तत्काल लम्बी तपस्या का पारणा गन्ने के रस से करवाया , गन्ने के रस को इक्षु रस भी कहते है इसी कारण इक्षु तृतीया या अक्षय तृतीया के नाम से यह दिन जाने जाना लगा ।
आज भी जैन धर्मावलंबि वर्षी तप की आराधना करके अपने आप को धन्य समझते है ।
यह तपस्या प्रति वर्ष कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अस्टमी से प्रारम्भ हो कर दूसरे वर्ष की वेशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को पूर्ण होता है । इस प्रकार वर्षी तप 13 महीने और दस दिन का हो जाता है ।
यह तपस्या धार्मिक दृषटिकोण से तो महत्वपूर्ण है ही , संयमित जीवन यापन करके मन शांत होता है , विचारों मैं शुद्धता आती है ।

इस दिन कई धार्मिक व माँगलिक कार्यों की शुरूवात होती है ।
घर मैं नया मिट्टी का घड़ा ज़रूर रखे व उस पर घी से स्वस्तिक बनाए ।
श्री यंत्र स्थापित करे व पूजा करे ।

फ़ोटो स्त्रोत : गूगल

Astrologer/blogger

Usha Jain Bhatnagar






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