जन्म कुंडली व मानसिक रोग

स्वस्थ शरीर हो ख़ूब धन हो पर स्थिर मन ना हो तो यह सब व्यर्थ है । मन चंचल होता है हर समय कुछ ना कुछ विचार चलता ही रहता है । यह तब तक अच्छा है जब तक हमारी मानसिक शांति भंग ना हो और विचारों पर हमारा नियंत्रण हो । आज के इस आपा धापि के इस युग मैं मानसिक रोग बढ़ते ही चले जा रहे है , ज़रूरी नहीं कि वो पागलपन के लक्षण ही हो , मानसिक अवसाद व निराशा व अपराधबोध भी सभी मानसिक रोगों के प्रकार ही है ।
जन्म कुंडली मैं चंद्र , बुध , शनि व राहु की स्थिति को देख कर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ को जाना जा सकता है ।

चंद्रमा मन का कारक होता है , अगर जन्म कुंडली मैं चंद्रमा की स्थिति अच्छी नहीं है , शत्रु या नीच राशि का है , कम अंश का है और यदि बुध के साथ प्रतियुति कर रहा है तो ऐसा व्यक्ति जीवन मैं अवश्य मानसिक रोगों को शिकार होगा ।
चंद्र अगर राहु के साथ है तो ग्रहण योग बनता है इस स्थिति मैं जिससे मन की स्थिति अपने आप ही कमज़ोर हो जाती है ।
चंद्र के साथ अगर शनि की युती है तो विष योग बनता है ये योग व्यक्ति को प्रगति के शिखर तक पंहुचा सकता है पर इतनी अधिक मानसिक परेशानी देता है की आदमी कई बार जीवन को ख़त्म करने का प्रयास  कर सकता है ।
जन्म कुंडली मैं अगर चंद्र और बुध प्रतियुति मैं है और अस्टमेश है तो जातक जीवन मैं अवश्य ही भारी मानसिक आघातों को झेलेगा , बेहद निराशा से गुज़रेगा । जब कभी दशा मैं या गोचर मैं आएगा तब ये परेशनिया बहुत बढ़ सकती है ऐसे मैं परिवार का साथ और किसी की सलाह अवश्य ले ।
इसके लिए शिवजी की नियमित आराधना की जाए व लघु रूद्र का पाठ करे ।

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