कच्चे आम की लोंजी



कच्चे आम की कई dishes बनती है जिस मैं अचार और लोंजी सबसे ज़्यादा बनाए जाते है , जहाँ अचार हम कई दिनो के लिए preserve करके रखते है वही लोंजी फ़्रीज़ मैं चार पाँच दिन रख सकते है । इसका खट्टा मीठा स्वाद खाने का ज़ायक़ा बढ़ा देता है ।
 

आवश्यक सामग्री 

  • कच्चे आम        250 gm
  • शक्कर या गुड़   125gm
  • सोंफ                1tsp
  • राई                  1/2 tsp 
  • ज़ीरा                1/4tsp
  • लाल मिर्च         1/2tsp
  • हल्दी                1/4tsp
  • तेल                  1 tbsp
  • नमक       स्वादानुसार  

बनाने की विधि

आम को धो कर छिल कर बड़े टुकड़ों मैं काट ले । कढाही मैं तेल गरम करे ज़ीरा डाले , सोंफ दरदरी पिस कर डाले , राई व मिर्च , हल्दी नमक डाले , पाँच मिनट ढाँक कर पकाए । 
शक्कर या गुड़ डाले , ढाँक दे अगले पाँच मिनट मैं शक्कर पिघल जाएगी , थोड़ा गाढ़ा होने दे , गैस बंद करे । 
लोंजी तैयार है । 
ठंडी होने पर jam की तरह हो जाएगी । 
बच्चों को पराँठे मैं लगा कर रोल बना कर दे या चपाती , थेपलो के साथ खाए । 

विशेष 

देसी आम के बजाय तोता परी या कलमि आम ले , ये देसी आम से कम खट्टे होते है तो शक्कर या गुड़ कम डलेगा।
अगर देसी आम से बनाए तो बनाने से पहले काट कर आधे घंटे तक पानी मैं नमक मिला कर रखे । खट्टापन बहुत हद तक कम हो जाएगा ।





भुट्टे का किस








शायद कम लोगों ने सुना होगा भुट्टे के किस के बारे मैं , मध्य प्रदेश और राजस्थान मैं यह बनाया जाता है , मध्य प्रदेश के शहर इंदौर का तो प्रसिद्द है भुट्टे का किस ।
चटपटा , तिखा , हरे धनिए और निबु के साथ बहुत ही मज़ेदार नाश्ते का आइटम है ।
देसी मकई से बनाओ या अमेरिकन मकई से दोनो का ही स्वाद लाजवाब होता है ।
अमेरिकन मकई मैं जो मिठापन होता है वो इसके स्वाद को और भी बढ़ा देता है ।
             

आवश्यक सामग्री

  • ताज़े भुट्टे या मकई  3 
  • हींग                      1/4 tsp
  • लाल मिर्च             1/2 tsp
  • हल्दी                    1/4tsp
  • गरम मसाला          1/4tsp
  • नमक 
  • तेल                      1/2 cup
  • दूध                       1/2 cup
  • हरी मिर्च                3 
  • हरा धनिया 
  • निबु                  

बनाने की विधि 

भुट्टे को साफ़ कर ले सारे रेशे निकाल दे । भुट्टो को किस ले । 
कढाही मैं तेल गरम करे , हींग डाले , बारीक कटी हरी मिर्च डाले , किसे ( grated) भुट्टे डाले , मिर्च व हल्दी डाले , अच्छी तरह मिलाए , दूध डाले , व लगातार चलाते हुवे भूने , क़रीब बीस मिनट बाद कढाही के किनारों से तेल छूटने लगेगा , मतलब किसा हुवा भुट्टा अच्छी तरह से सिक गया है । 
नमक व गरम मसाला डाले । 
हरा धनिया डाल कर गरम सर्व करे । 
Crunchiness लाने के लिए ऊपर थोड़े आलू के चिप्स तोड़ कर डाले । 

विशेष 

अमेरिकन मकई मैं दूध डालने की ज़रूरत नहीं होती है , देसी मकई मैं ज़रूर डाले । 
निबु डालना ऑप्शनल है , मन चाहे तो डाले , कई लोगों को सिर्फ़ इसका तिखा स्वाद ही पसंद आता है ।

रोस्टेड चिवड़ा

 
                         
            
                                           
चावल से बना पोहा हल्का और पचने मैं आसान होता है , साथ ही बहुत केलोरि नहीं देता है । चिवड़ा सामान्य तोर पर तल कर बनाया जाता है ।
यदि रोस्ट करके बनाए तो  जो calorie conscious है वो भी इसे बेफ़िकर हो कर खा सकते है , और तला हुवा ना होने से shelf life भी बढ़ जाती है ।

आवश्यक सामग्री 

नाइलॉन पोहा  ( पतला पोहा )  250 gm 
भूने चने की दाल. 50 gm 
मूँगफली के दाने   50 gm 
करी पत्ता         1/4 cup 
हरी मिर्च          7
लाल मिर्च        1 tsp
हल्दी                1/4 tsp
नमक.        
पिसी हुई शक्कर   4 tbsp 
तेल                     1 cup 

बनाने की विधि 

पोहा एक मोटी छलनी से छान ले , ताकि बारीक पोहा अलग हो जाए , एक कढाही मैं बगेर तेल के पोहा भून ले , क़रीब दस मिनट तक लगातार चलाते हुवे भूने , पोहा थोड़ा सिकुड़ जाएगा । ठण्डा होने रख दे । 
कढाही मैं तेल गरम करे , मूँगफली के दाने डाले , भूरे होने तक तले और पोहे मैं डाल दे , इसी प्रकार भूनी चना डाल भी तल कर डाल दे । 
हरी मिर्च को बड़े टुकड़ों मैं काट ले , व तेल मैं डाल कर तले इसी के साथ करी पत्ता भी तले , करी पत्ता तलने पर कड़क व भूरा हो जाएगा , तेल सहित पोहो पर डाल दे , हल्दी , लाल मिर्च , नमक व शक्कर मिलाए , व अच्छी तरह मिक्स कर ले , तेल गरम होने से मसाले अच्छी तरह मिक्स हो जाएँगे । 
ठण्डा होने पर इसे air tight container मैं भर कर रखे । 
चाय के साथ आनंद ले ।

विशेष 

यदि थोड़ा खट्टा मीठा टेस्ट पसंद है तो इसमै tartaric acid  पिस कर मिला दे । 
ये तला हुवा नहीं होता है इसलिए हम इसे ज़्यादा मात्रा मैं बना कर ज़्यादा दिनो तक रख सकते है । 
हरी मिर्च के टुकड़े आप चाहे तो तलने के बाद बाहर निकाल सकते है , क्यूँकि तलने से मिर्च का तिखापन तेल मैं आ जाता है ।
                 







टमाटर का अचार


                             
आम का अचार , निबु का अचार ये बड़े कॉमन अचार है जो हर ग्रहिणि बनाना जानती है , टमाटर का अचार थोड़ा अलग तरीक़े से बनाया जाता है और स्वाद भी बेहद चटपटा बिलकुल अलग ।
क्यूँकि ज़्यादा अचार सरसों के तेल मैं बनते है और उनमै पड़ने वाले मसाले भी अलग होते है ।
मैं आपको टमाटर के अचार की ऐसी विधि शेयर कर रही हू जिसे आप भी ज़रूर बनाना चाहेंगी , अच्छी बात यह है की इस अचार के लिए हमें किसी ख़ास मौसम का इंतज़ार नहीं करना पड़ता है , क्यूँकि टमाटर हर मौसम मैं मिलते है ।

आवश्यक सामग्री
पके लाल टमाटर  1 kg
करी पत्ता             1/4 कप
राई                     2 tbsp
मेथी दाना            1 tsp
लाल मिर्च            1 tbsp
शक्कर                3 tbsp
विनेगर                 1 tbsp
तेल                      एक कप
नमक    स्वादानुसार
                       
                        

बनाने की विधि 

टमाटर को धो कर छोटे टुकड़ों मैं काट ले ।
नान स्टिक कढाही मैं तेल डाले , राई , मेथीदाना डाले , राई चटकने पर करी पत्ता डाले , टमाटर डाले , लाल मिर्च व नमक डाले , मद्धम आँच पर रखे । 
बीच बीच मैं चलाते रहे टमाटर पकने मैं व पूरा पानी सूखने मैं कम से कम दो घंटे लगेंगे । 
तब तक आँच पर रखे जब तक की तेल ना छूटने लगे । अंत मैं शक्कर डाले । 
ठण्डा होने पर विनेगर डाले । व air tight container मैं भरे । 
दो से तीन महीने तक फ्रिज के बाहर रख सकते है । 
थेपला , पराँठा , खाखरा , ब्रेड पर लगा कर खाइए । 








अक्षय तृतीया

                       
अक्षय तृतीया या हमारी मालवी मैं आखा तीज वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते है । अक्षय तृतीया 7 मई 2019 को आ रही है।
अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप मैं जाना जाता है इस दिन बगेर मुहूर्त देखे जो भी कार्य किया जाता है व शुभ होता है । अक्षय मतलब जिसका क्षय नहीं होता है जो कभी ख़त्म ना हो । इस दिन विवाह , ग्रह प्रवेश , आभूषण ख़रीददारी आदि शुभ होते है ।
भविष्य पुराण के अनुसार सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ इसी तिथि को हुवा था । नर नारायण , हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण इसी तिथि को हुवा था ।
इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुवा था व इसी के साथ द्रापर युग का समापन भी हुवा था ।
बदरिनाथ मैं कपाट इसी तिथि को खुलते है , और वृंदावन मैं बाँके बिहारी के चरण कमल के दर्शन इसी दिन होते है , अन्यथा पूरे वर्ष विग्रह वस्त्रों से ढँके होते है ।
स्कन्द पुराण व भविष्य पुराण मैं बताया गया है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुवा था ।
इसके अतिरिक्त अन्य कई जन श्रुतियाँ प्रचलित है ।

जैन धर्म मैं अक्षय तृतीया 

जैन धर्मावलंबियों के लिए इस दिन का अत्यधिक महत्व है । इसी दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ देव भगवान ने   लगभग 400 दिन की तपस्या के बाद पारणा किया था , अतः जैन धर्म मैं इसे वर्षी तप कहा जाता है ।
भगवान आदिनाथ भौतिक व पारिवारिक सुखों का त्याग कर सत्य व अहिंसा का प्रचार करते हुवे हस्तिनापुर पंहुचे , तब वहाँ उनके पोत्र सोमयश का शासन था , सम्पूर्ण नगर दर्शन के लिए उमड़ा तब सोमयश के पुत्र श्रेयांश कुमार ने प्रभु आदिनाथ को पहचान लिया व तत्काल लम्बी तपस्या का पारणा गन्ने के रस से करवाया , गन्ने के रस को इक्षु रस भी कहते है इसी कारण इक्षु तृतीया या अक्षय तृतीया के नाम से यह दिन जाने जाना लगा ।
आज भी जैन धर्मावलंबि वर्षी तप की आराधना करके अपने आप को धन्य समझते है ।
यह तपस्या प्रति वर्ष कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अस्टमी से प्रारम्भ हो कर दूसरे वर्ष की वेशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को पूर्ण होता है । इस प्रकार वर्षी तप 13 महीने और दस दिन का हो जाता है ।
यह तपस्या धार्मिक दृषटिकोण से तो महत्वपूर्ण है ही , संयमित जीवन यापन करके मन शांत होता है , विचारों मैं शुद्धता आती है ।

इस दिन कई धार्मिक व माँगलिक कार्यों की शुरूवात होती है ।
घर मैं नया मिट्टी का घड़ा ज़रूर रखे व उस पर घी से स्वस्तिक बनाए ।
श्री यंत्र स्थापित करे व पूजा करे ।

फ़ोटो स्त्रोत : गूगल

Astrologer/blogger

Usha Jain Bhatnagar






कालसर्प योग 2

पातक कालसर्प योग 

यदि तृतीय भाव मैं राहु तथा नवम भाव मैं केतु स्थित हो एवं अन्य सभी ग्रह इन दोनो के मध्य स्थित हो तो पातक नामक कालसर्प योग बनता है ।
युवावस्था मैं जब भी राहु की दशा या अंतर्दशा आती है तब इसका अशुभ प्रभाव मिलना शुरू हो जाता है । 
तृतीय भाव मैं होने से भाईयों पर व उनसे संबंधो पर इसका प्रभाव पड़ता है । 
इस योग के जातक धेर्यहीन व लापरवाह क़िस्म के होते है । कार्यों मैं अनसोचि रूकावटें आती रहती है , यात्रा मैं क़स्ट व हानि होती है ।
दाम्पत्य जीवन छोटे भाई बहनो के कारण तनावपूर्ण रहता है , अनेतिक सम्बंध भी तनाव का कारण होते है । 
स्वयं के दुस्साहस के कारण हानि होती है ।
क्रय विक्रय के कार्यों मैं असफलता मिलती है , यात्राओं से सम्बंधित कार्यों मैं भी असफलता मिलती है ।
             
                                 
 


विषाक्त कालसर्प योग 

यदि राहु चतुर्थ भाव मैं व केतु दशम भाव मैं स्थित हो व अन्य सभी ग्रह इनके मध्य स्थित हो तो विषाक्त नामक कालसर्प योग बनता है । 
पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है । इस योग का प्रभाव चार वर्ष की आयु से दिखने लगता है व कई कुंडलीयो मैं विवाह के पस्चात अधिक प्रभाव दिखाई देता है । 
इस योग का प्रभाव जातक की माता , मान सम्मान , पारिवारिक जीवन , भवन व वाहन पर दिखाई देता है । 
माता के सुख मैं कमी रहती है , जातक स्थायी रूप से कही रह नहीं पता है , संपती , घर व वाहन सुख मैं भी बाधा आती है यदि चतुर्थ भाव मैं राहु के साथ सप्तमेश की युती हो तो जीवनसाथी के परिवार के सदस्यों से तनाव व विवाद के कारण मानसिक शांति भंग हो जाती है । 
विवाह के बाद परिवार से दूर रहना पड़ता है । 
भूमि , संपती व वाहन से जुड़े कार्यों मैं हानि होती है । 
               

शेषनाग कालसर्प योग 

जब पंचम भाव मैं राहु एवं एकादश भाव मैं केतु स्थित हो और अन्य सभी ग्रह इनके मध्य स्थित हो तो शेष नाग नामक कालसर्प योग बनता है । 
इस योग का प्रभाव विद्धया , संतान एवं अध्यन पर पड़ता है । 
इस योग की वजह से प्रेम प्रसंगो मैं असफलता मिलती है जिससे निराशा का सामना करना पड़ता है ।
अगर पंचम भाव मैं राहु के साथ सप्तमेश की युती हो तो जातक प्रेम प्रसंगो के कारण दाम्पत्य जीवन बरबाद कर लेता है 
पंचमेश राहु के कारण अधिक महत्वकांशी होता है व जोखिम पूर्ण कार्य करता है , अनेतिक संबंधो के कारण भी कई पारेशानियो का सामना करना पड़ता है । 
                 
                 



तरबूज़ स्लश


          

गरमियों मैं कुछ ठण्डा पीने को मन करता है , कोल्ड ड्रिंक और packed फ़्रूट जूस के बजाय हम घर मैं ही ताज़ा फलो का जूस , smoothie या स्लश बना कर पिए जो healthy और econamical भी होगा ।
गरमियों मैं लाल तरबूज़ देख कर ही खाने का मन करता है , फ़ायदेमंद भी बहुत है क्यूँकि इसमै water content ज़्यादा है और केलोरि बिलकुल नहीं है ।
तरबूज़ काट के खाए या जूस बना कर पिए , अब आप स्लश भी बना कर देखिए , जो बच्चे फल खाने मैं आनक़ानी करते है वो भी इसे बहुत शोक से पिएँगे ।

आवश्यक  सामग्री 

तरबूज़ कटा हुवा   1कप
शक्कर                3 tbsp
आइस क्यूब्ज़       3 कप
  
बनाने की विधि  

तरबूज़ को छोटे टुकड़ों मैं काट ले , बीज निकाल दे , शक्कर और आइस क्यूब ले , तिनो को ब्लेंडर मैं ग्राइंड कर ले । 
ग्लास मैं नीचे कुछ आइस क्यूब्ज़ डाले और स्लश डाले । 
स्ट्रॉ से पिए या चम्मच से खाए । 
थोड़ा tangy बनाना है तो ग्राइंड करते समय आधा चम्मच निबु का रस और चार पाँच पत्तियाँ ताज़े पुदीने की डाले और थोड़ा सा काला नमक डाले । 
मीठा या नमकीन चाहे जो टेस्ट का बना ले । 
मेरी preference मीठे की होती है ।
               
                 







शक्करपारे

पहले हर त्योहार मैं या हर मोके पर मिठाई के नाम पर शक्करपारे और लड़ूँ ही होते थे , शक्करपारे आज भी हर मोके पर ज़रूर बनाए जाते है । बच्चों की छुट्टियाँ होती है तब उन्हें पूरे दिन कुछ ना कुछ खाने के लिए चाहिए तो घर मैं बने शक्करपारे एक अच्छा ऑप्शन है ।
बनाने मैं आसान है , ज़्यादा चीज़ों की ज़रूरत भी नहीं होती और आठ से दस दिन तक बना कर रख भी सकते हैं।

आवश्यक सामग्री

मैदा        500gm
रवा         50gm
तेल         100ml
शक्कर     200 gm
दूध          1 कप
तलने के लिए तेल

बनाने की विधि

शक्कर मैं आधा कप पानी मिला कर , गरम करके शक्कर का घोल बना ले ।
मैदा और रवा छान कर तेल का मोयन डाल कर शक्कर का घोल मिला कर आटा गूँथ ले न ज़्यादा कड़ा न ज़्यादा ढीला , दूध की जितनी आवश्यकता है उतना गुँथने मैं डाले ।
आधा घंटा ढक कर रखा रहने दे ।
आधे घंटे बाद आटे का बड़ा गोला बना कर मोटा बेल ले , चाकु से क्यूब शेप मैं या डाइमंड शेप मैं काट ले ।
तेल गरम होने पर तलने के लिए डाले , आँच मध्यम कर दे , पलटते हुवे सुनहरे होने तक तल ले ।
ठंडे होने पर डब्बे मैं भर कर रखे ।
मैंने क्यूब शेप के बनाए है , आप चाहे तो राउंड शेप भी बना सकते है ।



कालसर्प योग

कालसर्प योग के बारे मैं जनमानस मैं डर व कई भ्रांतिया है , मैं अपने इस ब्लॉग मैं कालसर्प योग के बारे मैं सरल व तथ्यपरक जानकारी दे रही हू जिससे सामान्य व्यक्ति जिसे ज्योतिष के बारे मैं बहुत जानकारी ना हो वह भी जान सकता है की उसकी कुंडली मैं किस प्रकार का कालसर्प योग है ।
जन्म पत्रिका मैं जब सभी ग्रह राहु एवं केतु के मध्य हो जाते है तो काल सर्प योग बनता है । राहु एवं केतु हमेशा वक्रि भ्रमण करते है , अर्थात जिस राशि मैं स्थित होते है वहाँ से गोचर मैं भ्रमण के दोरान पिछली राशि मैं जाएँगे ।
पूर्ण कालसर्प योग मैं सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हो जाते है । यदि चंद्रमा राहु और केतु की परिधि से बाहर निकलता है तो अर्ध कालसर्प योग का निर्माण होता है  यदि दो या दो से अधिक ग्रह राहु केतु की परिधि से बाहर हो तो कालसर्प योग नहीं बनता है , यह भी जातक पर दुष्प्रभाव डालता है ।
राहु को कालसर्प का मुख और केतु को कालसर्प की पूँछ माना जाता है

जन्म पत्रिका मैं राहु जिस भाव मैं स्थित हो उसी के अनुसार भिन्न भिन्न प्रकार के कालसर्प योग का निर्माण होता है ।
कालसर्प योग 12 प्रकार के होते है ।

कारकोटिक कालसर्प योग

यदि लग्न मैं राहु एवं सप्तम भाव मैं केतु स्थित हो एवं सभी ग्रह सप्तम भाव से ले कर लग्न तक स्थित हो तो कारकोटिक कालसर्प योग बनता है ।
लग्न मैं ही राहु के स्थित होने से इस योग का प्रभाव जातक के व्यक्तित्व , स्वास्थ , कार्य , स्वभाव , लगभग जीवन के हर क्षेत्र मैं पड़ता है ।
इस योग का दुष्प्रभाव 18 वर्ष की आयु के पस्चात ही दिखाई देता है ।
लग्न और सप्तम भाव के मध्य होने से वेवाहिक जीवन मध्यम रहता है , जातक क्रोधी , घमंडी व बोलने मैं ध्यान नहीं रखने  वाला होता है जिससे जीवनसाथी से अन बन चलती रहती है ।
यदि इस योग मैं राहु के साथ लग्न मैं सप्तमेश की युती हो तो जातक का दाम्पत्य जीवन बेहद तनावपूर्ण व दुखी रहता है
इस योग के कारण जातक अपने स्वभाव व कार्य के कारण कार्य क्षेत्र , परिवार व समाज मैं रूकावटें खड़ी कर लेता है।
जंहा तक हो सके किसी भी प्रकार के अनेतिक व गेर क़ानूनी कार्यों से बच कर रहे ।

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शंखनाद कालसर्प योग

यदि दिृतीय भाव मैं राहु तथा अष्टम भाव मैं केतु स्थित हो तो तथा अन्य सभी ग्रह इनके मध्य स्थित हो तो शंखनाद कालसर्प योग बनता है ।
इस योग का प्रभाव जब राहु की महदशा हो या अंतर्दशा हो तब अधिक दिखाई देता है ।
दिृतीय भाव मैं होने से परिवार व धन व वाणी पर प्रभाव दिखाई देता है । पेत्रक संपती पर भी इसका प्रभाव रहता है ।
इसके दुष्प्रभाव से संचित धन का नाश होता है , कूटुंबिजनो से विवाद एवं आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है
ऐसे जातक सामान्यत परिवार से अलग रहते है ।
यदि सप्तमेश राहु के साथ दिृतीय भाव मैं स्थित हो तो ससुराल पक्ष से समस्या रहती है व सम्बंध सामान्य नहीं रहते है , बातचीत मैं संयम ना रहने से कार्य क्षेत्र व परिवार मैं परेशानिया आती है ।
                 
                         
             
       
                           

अन्य काल सर्प योगों के बारे मैं मेरे अगले ब्लॉग मैं पढ़े ।








कुर कुरी भिण्डी





भिण्डी और आलू दो ऐसी सब्ज़ियाँ है जो बच्चों से ले कर बड़ों तक सबको पसंद होती है । कई तरीक़ों से भिण्डी बनायी जाती है , प्याज़ वाली , भरवाँ , दही भिण्डी ।
आज मैं आपसे बेसन भिण्डी की receipy शेयर कर रही हू जो सब्ज़ी की तरह तो हम खा ही सकते है बल्कि as a स्नैक्स भी हम चाय के साथ खा सकते है ।

आवश्यक सामग्री

भिण्डी  250 gm
बेसन.   2 tabs
लाल मिर्च  1/2 tsp
नमक   स्वादानुसार
 चाट मसाला 1 tsp
तेल        1 बड़ा चम्मच


                  

बनाने की विधि

भिण्डी को धो कर पोंछ ले , चार फाड़ी कर के लंबा काट ले , इसमै बेसन व लाल मिर्च मिलाए , अच्छी तरह से मिला दे जिससे बेसन भिण्डी पर लिपट जाए ।
15 मिनट  तक इसे फ़्रीज़ मैं रख दे ।
कढाही मैं तेल गरम करे , फ़्रीज़ से भिण्डी निकाल कर थोड़ी थोड़ी कर के तेल मैं सुनहरी होने तक तले ।
इसमै नमक और चाट मसाला डाले ।
कुर कुरी भिण्डी तैयार है चाहे तो इसे चपाती , पराँठे के साथ या चावल मैं मिक्स करके खाए , या चाय के साथ खाए ,हर तरीक़े से खाने मैं बेहद टेस्टी और अलग भी लगेगी ।

विशेष

तेल ज़्यादा न ले क्यूँकि बेसन से तेल ख़राब हो जाएगा , इसे फ़िल्टर करके दोबारा उपयोग कर सकते है ।
फ़्रीज़ मैं रखने से बेसन तेल मैं ज़्यादा बिखरता नहीं है और करारापन ज़्यादा आता है ।



अखरोट




अखरोट और बादाम दो ऐसे मेवे है जिनके खाने से अनगिनत फ़ायदे होते है । अखरोट को अंग्रेज़ी मैं walnut  कहते है । इसकी गिरी दिमाग़ की तरह दिखती है शायद इसलिए इसे ब्रेन फ़ूड भी कहा जाता है ।
भारतीय घरों मैं सर्दियों मैं बनने वाले लड़ूँ मैं सबसे ज़्यादा अखरोट डाले जाते है इसके अलावा अखरोट बर्फ़ी भी बड़ी फ़ेमस है , केक , पेस्ट्री मैं भी इसका बहुत इस्तेमाल होता है । 
एक दिन मैं अगर तीन से चार अखरोट खाए जाए तो शरीर को कई nutrients मिल जाएँगे जो कई गम्भीर बीमारियों से बचाव करेंगे ।
इसका आवरण सख़्त व भूरे रंग का होता है और इसकी गिरी पर एक पतली सी झिल्ली होती है और आकार ब्रेन की तरह होता है । खाने मैं यह फीका लगता है इसलिए अगर सिर्फ़ अखरोट का स्वाद अच्छा ना लगे तो किशमिश के साथ , सलाद के साथ या थोड़ा सा नमक बुरक कर खायें।
अखरोट ख़रीदते समय यह अवश्य ध्यान रखे की इसका बाहरी छिलका पतला हो व वज़न मैं हल्का हो ।मोटे छिलके व भारी वज़न वाले अखरोट अच्छी क्वालिटी के नहीं होते है और इनमै से गिरी निकालना बहुत मुश्किल होगा । पतले छिलके वाले अखरोट  कागदी अखरोट कहलाते है ।गिरी के बजाय छिलके सहित अखरोट ही ख़रीदे , गिरी बहुत जल्दी ख़राब हो जाती है , और जहाँ तक जो सके फ़्रीज़ मैं रखे ।
अखरोट  मैं पाए जाने वाले पोषक तत्व 

अन्य सभी मेवों से अखरोट मैं ज़्यादा पोषक तत्व होते है , इसमै ओमेगा 3 और ओमेगा - 6 fatty acids
प्रचुर मात्रा मैं होते है , कई poly unsaturated fatty acids होते है , कई मिनेरल्स जैसे कापर , मेग्निस , मेग्निशियम , कैल्सीयम , आयरन , पोटेशियम व फ़ास्फोरस होते है । 
इसमै विटामिन B 6 , विटामिन E , विटामिन C , विटामिन A व विटामिन K होता है । 
इसकी गिरी पर एक पतला छिलका होता है जिस मैं सर्वाधिक मात्रा मैं antioxidants होते है जैसे फ़ेनोलिक ऐसिड और flavanoids होते है ।
अखरोट मैं 65% फ़ैट होता है , 14% कार्बोहाइड्रेट , 15% प्रोटीन ,11% फायबर होते है , इतनी अधिक मात्रा मैं फ़ैट होने के बावजूद भी इसको खाने से केलोरि तो मिलती है पर वज़न नहीं बढ़ता है ।
कुल मिला कर इसकी गिरी मैं अनगिनत nutrients होते है जो अच्छे स्वास्थ के लिए ज़रूरी है , इसको अपनी डेली diet मैं शामिल करे ।
हम इसके फ़ायदों के बारे मैं जाने 

ह्रदय  : इसके नियमित सेवन से LDL कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करता है और HDL गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है ,इसमै पाए जाने वाला l-arginine ह्रदय सम्बंधी कई रोगों को दूर करता है ।
इसमै मोजूद omega-3 alphalinolenic acid ख़ून का थक्का बनने से रोकता है ।
High B P को कम करने मैं मदद करता है ।

दिमाग़  : इसमै मोजूद कई तत्व जैसे विटामिन E , मेलाटोनिन , ओमेगा -3 फ़ैटी ऐसिड , फोलेट और anti oxidents है जो दिमाग़ को स्वस्थ व तेज़ बनाने मैं मदद करता है । बच्चों की याददाश्त तेज़ करने मैं बेहद कारगर है । 

हड्डियाँ। : इसके लगातार सेवन से हड्डियाँ मज़बूत होती है , इसमै मोजूद essential fatty acids कैल्सीयम का अवशोषण करता है जिससे हड्डियाँ मज़बूत होती है ।

उम्र का प्रभाव  : उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर मैं कई free redicals बनने लगते है जिससे झुर्रियाँ , कमज़ोर पाचन , कमज़ोर नज़र आदि हो जाती है, इसमै मोजूद anti oxidants  anti aging का काम करते है । 

Sperm count बढ़ाता है  : इसके aphrodisiac गुणो के कारण sperm count , sperm mobility को बढ़ाता है । 

मूड ठीक करता है। : यदि तनाव या अवसाद है व बार बार mood swings ( जो pre menopausal महिलाओं मैं अधिक होता है ) तो आज से ही अखरोट खाना शुरू कर दे । 

कैन्सर। : अखरोट को anti cancer food भी माना जाता है क्योंकि इसमै anti oxidants और phenolic acid है जो IGF - l हॉर्मोन को कंट्रोल करके प्रॉस्टेट कैन्सर और ब्रेस्ट कैन्सर से बचाव करता है ।

मधुमेह को कंट्रोल करता है  : type 2 diabeties के रोगी इसका नियमित सेवन करके शुगर को कंट्रोल मैं रख सकते है । 

पेट ठीक रखता है : इसमै पर्याप्त मात्रा मैं फायबर व मिनेरल्स होने से मेटाबोलिस्म ठीक होता है ।

नींद  : इसमै मोजूद मेलाटोनिन नींद लाने मैं सहायक होता है ।
सलाद या दूध के साथ सोने से पहले अखरोट का सेवन अनिद्रा रोग को दूर करता है ।

बाल  : इसमै मोजूद विटामिन B 7 , potassium, omega -3 6 fatty acids बालों को स्वस्थ व चमकदार बनाते है इसके तेल से मालिश करने पर खुजली , dendraf की समस्या से निजात मिलती है ।

त्वचा के लिए  : अखरोट का उपयोग कई ब्यूटी प्रॉडक्ट्स मैं होता है जैसे lotions , cream, scrubs आदि , इसमै पाए जाने वाले विटामिंस wrinkles, fine lines , dullness को ठीक करते है ।


इसमै कई ओषधिय गुण होते है है 
1: रोज़ाना 3 अखरोट खाने से याददाश्त तेज़ होती हैं अतः बच्चों को अवश्य खिलाए ।
2 : immunity system ठीक होता है ।
3 : अखरोट के छिलके को जला कर , पिस कर बारीक पाउडर बना ले व इससे मँजन करने से दाँत मज़बूत होते है । 
4 : BP नियंत्रित रहता है । 
5 : सफ़ेद दाग़ से परेशान है तो रोज़ाना 4-5 अखरोट खाए कुछ महीनो मैं अवश्य लाभ होता है । 
6 : depression व mood swing से बचने के लिए रोज़ाना 3 अखरोट खाए ।
7 :क़ब्ज़ के रोगी को इससे फ़ायदा होगा । 
8 : लिवर सम्बंधी रोग , जोड़ो के दर्द मैं लाभ होगा ।

अखरोट खाने से नुक़सान 

अधिक मात्रा मैं खाने से इसके कुछ side effects होते है , अगर किसी को इससे एलेरजी है तो skin पर rashes हो सकते है , साँस लेने मैं परेशानी हो सकती है । 
अधिक मात्रा मैं खाने से वज़न भी बढ़ सकता है ।
अधिक खाने से पेट दर्द व दस्त भी हो सकते है । 
काले अखरोट से ज़्यादा problem हो सकती है  अतः देख कर खाए ।
गर्भवती स्त्रियाँ डाक्टर की सलाह से इसका सेवन करे । 
अखरोट खाने के फ़ायदे अनगिनत है और नुक़सान ना के बराबर , इसलिए आज से ही इसे अपनी डेली डाइट मैं शामिल करे ।



स्टफ गुझिया दही बड़ा





हर पार्टी के मेन्यू मैं दही बड़ा ज़रूर होता है , सभी लोग पसंद करते है , अमूमन हर महिला इसको बनाना जानती है ।
धुली हुई उरद डाल या चवले की दाल के दही बड़े बनाए जाते है ।
मैं  उरद डाल के स्टफ दही बड़े की विधि शेयर कर रही हू जो मैंने अपनी सासु माँ से सिखी है । दही चटनी के साथ सूखे मेवे और किशमिश का स्वाद इन दही बड़ों को लाजवाब बना देता है ।
लेकिन इनको बनाने का तरीक़ा थोड़ा टिपिकल होता है , मैं लिख कर बताने के साथ एक विडीओ भी शेयर कर रही हू जिससे बनाने मैं आसानी होगी ।




आवश्यक सामग्री
बड़ों के लिए

धुली हुई उरद डाल 250 gm
नमक
तलने के लिए तेल

स्टफ़िंग के लिए
बादाम 20
काजू. 20
किशमिश 40
बारीक कटी हरी मिर्च 5

सर्व करने के लिए

दही
इमली की चटनी
नमक
लाल मिर्च पाउडर
भूना हुवा ज़ीरा पाउडर



बड़ा बनाने की विधि
उरद दाल को धो कर दो घंटे के लिए भिगो दे , अतिरिक्त पानी निथार कर मिक्सी मैं पिस ले , पानी इतना ही डाले की दाल पिस जाए , एक चम्मच नमक डाले व दाल को चम्मच से ख़ूब अच्छी तरह फेंट ले । इतना फेंटे की डाल हल्की लगने लगे ।
तेल गरम करने रखे ,एक साफ़ कपड़ा ले उसे गिला कर ले , इस कपड़े को चपाती बेलने वाले चकले पर रखे , पिसी हुई दाल का एक चम्मच कपड़े पर रखे , हाथ से गोल पूरी की तरह फेला दे , आधे भाग मैं कटे बादाम , काजू , किशमिश व हरी मिर्च रखे , आधे भाग को कपड़े सहित दूसरे आधे भाग पर रख दे , कपड़ा गिला होने से दाल फिसल कर दूसरे आधे भाग पर आ जाएगी , और गुझिया का शेप बन जाएगा ।
हथेली को अच्छी तरह गिला करे , दाल की गुझिया हथेली पर पलट दे व बहुत सावधानी से तेल मैं छोड़ दे । सुनहरा होने तक तले ।
एक बर्तन मैं पानी गरम करे , गैस बंद करे इस पानी मैं तले हुवे बड़े डालते जाए । कम से कम दो घंटे तक पानी मैं दुबे रहने दे ।दो घंटे बाद हाथ से दबा कर अतिरिक्त पानी निकाल दे ।
एक बर्तन मैं एक कटोरी दही ले इसमै एक गिलास पानी मिलाए , सारे बड़े उसमें डाल दे ।
अन्य बर्तन मैं दही ले , दही को अच्छी तरह फेंट ले , ध्यान रखे दही अधिक खट्टा ना हो , एक प्लेट मैं बड़ा रखे ऊपर से दही डाले , इमली की चटनी डाले ,लाल मिर्च , भूना ज़ीरा पाउडर व नमक डाले ।
बेहद टेस्टी ड्राई फ़्रूट के गुझिया दही बड़े तैयार है ।
किटी पार्टी मैं बना कर अपनी दोस्तों पर अपनी पाक कला की धाक जमाइए ।
विशेष
इसको बना कर तलना थोड़ा सा ट्रिकी है , विडीओ देखने के बाद सावधानी से बनाए ।


South west direction

साउथ वेस्ट ( दक्षिण पस्चिम ) दिशा

• साउथ वेस्ट ( दक्षिण पस्चिम ) दिशा जैसे नैऋतय  कहा जाता है का स्वामी राहु है , यदि घर मैं यह दिशा ख़ाली है या कोई गड्ढा है या कोई काँटेदार पेड़ है तो ग्रह स्वामी हमेशा बीमार रहेगा या शत्रुओं से पीड़ित रहेगा या क़र्ज़ से पीड़ित रहेगा
 •ये दिशा हमेशा भारी रहना चाहिए , अगर जगह ख़ाली है तो हमेशा आर्थिक तंगी रहेगी ।
  •यदि इस दिशा मैं रसोई घर है तो पति पत्नी मैं अन बन रहेगी , महिलाओं को पेट सम्बंधी परेशनिया रहेगी ।
 • अगर इस दिशा मैं कोई पानी का स्त्रोत है तो राहु + चंद्रमा का प्रभाव है , मानसिक रोगों से पीड़ित रहेंगे , व हमेशा भयग्रस्त रहेंगे ।
 • यदि इस दिशा की दीवार टूटी हुई या दरारों वाली है तो घर का कोई ना कोई व्यक्ति अवश्य ही प्रेत बाधा से पीड़ित हो सकता है ।
 • ईशान की अपेक्षा यह भाग निम्न हो मतलब अगर ढलान इस दिशा की और हो तो शत्रु बढ़ेंगे , पड़ोसियों से सम्बंध अच्छे नहीं रहेंगे ।
 • यदि इस दिशा मैं स्नान ग्रह है तो ग्रह स्वामी की कुंडली मैं मंगल और राहु का दुस्प्रभाव रहेगा और उसे जीवन मैं कई बार प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा ।
 • नेऋतय दिशा वाले ग्रहों के लिए दक्षिण पस्चिम मैं उत्तर पूर्व की अपेक्षा अधिक ख़ाली भाग हो यदि दक्षिण भाग मैं अधिक हो तो घर की स्त्रियों के लिए व पस्चिम भाग अधिक ख़ाली हो तो पुरुष सदस्य अल्पायु होते है और ऐसे घर पराधिन हो जाते है ।
 • फाटक एक ही दिशा मुखी होना चाहिए या तो दक्षिण दिशा मैं या पस्चिम दिशा मैं । अगर दोनो दिशाओं मैं द्वार होगा तो घर के सदस्यों के मध्य शत्रुता बढ़ेगी ।
 • नेऋतय कक्ष को शयन कक्ष या भंडार ग्रह के रूप मैं इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन स्नान ग्रह के रूप मैं कभी भी नहीं
• अगर ये दिशा आगे को निकली हुई है तो शत्रु , क़ानूनी पचड़े व क़र्ज़ सम्बंधी परेशनिया बनी रहेगी ।

समाधान
अगर घर मैं यह दिशा दूषित है तो घर के पूजाघर मैं राहु यंत्र की स्थापना करे ।
घर के आस पास पानी जमा ना होने दे ।
घर के सभी पानी के निकास अच्छी तरह कार्य कर रहे हो उनमै कोई रुकावट ना हो ये व्यवस्था करे ।
घर के मुख्य द्वार पर भूरे या मिश्रित रंग के गणपति की प्रतिमा या चित्र लगाए ।


ब्रेड पाउच



 




 आलू , मटर की स्टफ़िंग से बने ब्रेड पाउच खाने मैं लाजवाब और बनाने मैं आसान है । रोल शेप मैं ना बनाके पाउच शेप मैं बनाने से देखने मैं ज़्यादा आकर्षक लगेंगे , ना नुकर करने वाले बच्चे इसे ज़रूर खाएँगे ।

 आवश्यक सामग्री
आलू  250gm
मटर  100 gm
अदरक  1 inch
हरी मिर्च   2
लाल मिर्च  1 चम्मच
गरम मसाला  1/2 चम्मच
हरा धनिया
ब्रेड
नमक
तेल

बनाने की विधि
आलू उबाल ले , छिल कर छोटे टुकड़ों मैं काट ले , मटर भी उबाल ले ।
कढ़ाई मैं एक चम्मच तेल गरम करे , बारीक कटा हुवा अदरक डाले , बारीक कटी हरी मिर्च डाले ,आलू व मटर डाले , लाल मिर्च व नमक डाले , हरा धनिया डाले ।अच्छी तरह मिक्स करे , ठण्डा होने दे ।

ताज़ा ब्रेड का स्लाइस ले , चाकु से किनारे काट ले , बेलन से ब्रेड को पतला कर ले , चारों किनारों पर पानी लगा ले , बीच मैं आलू का मसाला रखे और फ़ोल्ड करके चपटा करे और किनारे पानी लगा कर दबा कर बंद कर ले । ऐसे ही सारे पाउच बना ले ।
15 मिनट तक फ़्रीज़ मैं रखे ।
 कढ़ाई मैं तेल गरम करे और सारे पाउच तल ले , टिश्यू पेपर पर रखे , सावधानी से बीच से काटे , हरी चटनी और टोमटो सॉस के साथ सर्व करे ।
विशेष : फ़्रीज़ मैं रख कर तलने पर तेल कम सोखते है और ज़्यादा कुरकुरे बनते है


                  
             



खस खस Poppy seeds







खस खस जिसे अंग्रेज़ी मैं poppy seeds कहते है हम भारतीय इसे सदियों से मसाले के रूप मैं , औषधीय प्रयोग मैं व मिठाइयों को बनाने मैं करते आ रहे है ।
खस खस का पूरा पौघा ही उपयोगी है , इसके पत्तों को सब्ज़ी की तरह उपयोग किया जाता है जिसे आम बोलचाल की भाषा मैं अफ़ीम की भाजी कहा जाता है , इसे ताज़ा और सूखा कर उपयोग किया जाता है ।
इसके  कच्चे फलो के ऊपरी आवरण से अफ़ीम निकाला जाता है और बीज यानी खस खस जिसे हम खाने मैं प्रयोग करते है , इसकी जड़ो मैं एक अलग ही भीनी ख़ुशबू होती है जिसे कूलर मैं लगाया जाता है ।
खस का शरबत भी बनाया जाता है ।
भारत के अलावा ईरान व तुर्की मैं भी इसका उत्पादन होता है ।
औषधीय उपयोग के साथ ही इसका उपयोग बेकरी उत्पादों मैं , मिठाइयों मैं व हमारी विश्व प्रसिद्ध ठंडाई खस खस से ही बनती है ।







पोषण मैं खस खस का महत्व
• इसमै कई मिनरल जैसे आयरन, कापर , कैल्सीयम , मेंगनिस व ज़िंक होते है जो डाइजेशन और ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने मैं मदद करते है ।
• इसमै कई anti oxidants होते है जो गम्भीर बीमारियों से बचाव करते है ।
• खस खस के बीजों मैं बहुत ज़्यादा fibers होते है जो पेट सम्बंधी रोगों मैं फ़ायदेमंद होता है ।
• इसमै oleic acid होता है जो breast cancer के उपचार मैं मदद करता है ।
• इसमै कई फ़ैटी ऐसिड होते हैं जैसे ओमेगा 3 ऐसिड जो अच्छे स्वास्थ के लिए ज़रूरी है ।
• इसमै linoleic acid होता है जो LDL cholesterol लेवल को कम करके ह्रदय रोगों से बचाव करता है ।
• ये विटामिन B काम्प्लेक्स का बहुत अच्छा सोर्स है इसमै थायअमिन , रायबोफ़्लेविन , नायसीन , पैंटॉथेनिक ऐसिड और फ़ालिक ऐसिड होते है ।
• खस खस मैं अति सूक्ष्म मात्रा मैं ओपीयम अलकलोईड्स होते है इसलिए ये दर्दनाशक की तरह भी काम करता है इसलिए इसका कई औषधियों मैं प्रयोग किया जाता है ( ओपीयम अलकलोईड्स कुछ अधिक मात्रा मैं इसके सूखे फलो मैं होता है । जैसे मॉर्फ़ीन , tlebaine , codeiene and papaverine etc इन्हें भी दर्दनाशक की तरह उपयोग किया जाता है ) cough syrup मैं  nausea व जी मचलाने पर उपयोग किया जाता है ।
• इसमै कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा मैं होने से तुरंत शक्ति के लिए इसके दो चम्मच काफ़ी है ।
• अनिद्रा रोग मैं रात्रि को सोते समय इसका पेस्ट दूध मैं मिला कर पीने से अच्छी नींद आने लगती है ।
• इसे सौंदर्यवर्धक के रूप मैं भी प्रयोग किया जाता है । आँखो के नीचे के काले घेरे व झाँइयाँ इसका दूध मैं पेस्ट बना कर लगाने से कम हो जाती है ।
• कैल्सीयम होने से हड्डियों व जोड़ों के दर्द को भी कम करता है ।
• नकसीर रोकने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है
• migrane व आधा सीसी का दर्द इसके कुछ दिन नियमित उपयोग करने से ख़त्म हो जाता है ।
यह ऐसे खाने मैं अच्छे लगते है कई dishes पर कई बेकिंग items पर garnishing के काम आता है । सूखे के बजाय इसे भिगो कर पेस्ट बना कर उपयोग किया जाए तो इसके सभी पोषक तत्व मिलते है ।
ये अपने से दोगुना पानी सोख लेता है । सब्ज़ियों की ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है ।
इसका सबसे अधिक उपयोग हमारी प्रसिद्ध ठंडाई बनाने मैं किया जाता है ।

ठंडाई
सामग्री
खस खस  50 gm
शक्कर     100gm
दूध           250ml
काली मिर्च   10 dane
सोंफ        1 चम्मच
पानी  1/2 cup
ख़रबूज़े के बीज 2 चम्मच
विधि
खस खस को दो घंटे के लिए भिगो दे , अतिरिक्त पानी निथार दे , काली मिर्च , सोंफ , ख़रबूज़े के बीज मिला कर बारीक पिस ले , मलमल के कपड़े से पानी मिला कर छान ले , इसमै दूध व शक्कर मिला दे , ठण्डा करने के फ़्रीज़ मैं रखे । बर्फ़ डाल कर पिए । बहुत ही tasty व पोषक ठंडाई गरमियों मैं बेहद राहत देगी ।

खस खस का हलवा भी बेहद स्वादिस्ट व migrane व आधा सीसी के दर्द के लिए बेहद फ़ायदेमंद है ।

खस खस का हलवा
सामग्री
खस खस  50 gm
गेंहू का आटा  2 चम्मच
शक्कर    3 चम्मच
बादाम  10
पानी  1 cup
घी   3 चम्मच ,
बनाने की विधि
खस खस को दो घंटे भिगो कर , पिस कर पेस्ट बना ले , घी गरम करे पेस्ट व आटा डाल कर ब्राउन होने तक भूने , पानी डाले व चलाते रहे पानी आधा हो जाने पर शक्कर डाले , तब तक भूने जब तक की घी किनारा ना छोड़ दे । बादाम भिगो कर छिल कर बारीक काट कर गार्निश करे ।
ये हलवा लगातार कुछ दिनो तक खाने से सिर दर्द मैं काफ़ी राहत मिलेगी ।

खस खस यू तो बहुत फ़ायदेमंद है पर तीन चम्मच से ज़्यादा एक दिन मैं खाने से पेट दर्द व dizziness आने लगती है , अतः  सीमित मात्रा मैं सेवन करे । गर्भवती स्त्रियाँ इसका सेवन ना करे ।



चीज़ गार्लिक ब्रेड

गार्लिक ब्रेड लगभग सभी की पसंद है , चाहे तो इसे हम सूप के साथ ले , नाश्ते मैं ले या शाम की चाय के साथ ले ये हर कभी खायी जा सकती है ।
क्रिस्पी ब्रेड गार्लिक फ़्लेवर मैं देखते ही मुँह मैं पानी आ जाता है ।हम बाहर डोमिनोज़ मैं या पिज़्ज़ा हट मैं अक्सर as a स्टार्टर ज़रूर ऑर्डर करते है ।क्यूँ ना हम घर पर ही वैसे ही बना कर जब दिल चाहे खा सकते है ।
ज़रूरी नहीं कि इसके लिए हमारे पास माइक्रोवेव ओवेन ही हो , हम कोई भी नान स्टिक तवे पर गैस स्टोव पर आसानी से बना सकते है ।
बनने मैं मुश्किल से दस मिनट लगेंगे ।

सामग्री
ब्रेड चार स्लाइस
बटर  दो चम्मच
दो चीज़ क्यूब
एक हरी मिर्च बारीक कटी हुई
गार्लिक पाँच कलियाँ
चिल्ली फ़्लेक्स
ओरिगनो
काली मिर्च पाउडर
नमक

विधि
सबसे पहले बटर मैं एक पिंच नमक मिलाए , लहसून को छिल कर किस ले और बटर मैं मिला दे ।
ये बटर ब्रेड के दोनो तरफ़ लगा दे ।
तवा तेज़ गरम करे , उस पर ब्रेड रखे और मध्यम आँच कर दे , दोनो तरफ़ से पलट कर ब्रेड सेंक ले , इस ब्रेड पर चीज़ क्यूब को किस कर फेला दे , इसके ऊपर हरी मिर्च डाले व ढाँक कर दो तीन मिनट तक रखे ।
चीज़ पिघल जाएगा और ब्रेड कुरकुरि हो जाएगी ।
गैस बंद करे , ब्रेड को प्लेट मैं रखे ऊपर से काली मिर्च पाउडर , चिलि फ़्लेक्स और औरगनो डाले ।
आपकी चीज़ गार्लिक ब्रेड तैयार है ।
विशेष
रेड चिलि फ़्लेक्स और औरगनो आपको पसंद है तो डालिए ।
अगर माइक्रोवेव मैं बनाना है तो 200 डिग्री पर सात मिनट रखे ।

आलू चाट

सामग्री
आधा किलो आलू
हरी चटनी चार चम्मच
इमली की चटनी  चार चम्मच
चाट मसाला दो चम्मच
लाल मिर्च पाउडर  एक चम्मच
नमक स्वादानुसार
तलने के लिए तेल
विधि
आलू को एक सिटी दे कर हल्का गला ले । छिल कर छोटे टुकड़ों मैं काट ले , तेल गरम करे और आलू के टुकड़ों को सुनहरा होने तक तले , टिशू पेपर पर रखे ।

हरी चटनी
धनिया एक गड्डी
पाँच तीखी हरी मिर्च
एक बल्ब लहसून
एक मध्यम आकार का प्याज़
ज़ीरा आधा चम्मच
नमक
एक चम्मच निबु का रस
एक चुटकी हींग
विधि

सभी चीज़ों को मिला कर बारीक पिस ले , निबु निचोड़ दे , हरी चटनी तैयार है ।

इमली की चटनी
 100gm लाल इमली
250gm  गुड़
नमक
लाल मिर्च
राई 1/4 चम्मच
इमली को आधे घंटे भिगो कर , कुकर मैं दो सिटी दे दे , ठण्डा होने पर हाथो से अच्छी तरह मेश कर ले , छलनी से छान ले , तेल गरम करे राई का बघार दे , इसमै इमली का पल्प डाल दे आधा कप पानी डाले , गुड़ डाले , नमक व मिर्च डाले गाढ़ा होने तक उबाल ले । इमली की चटनी तैयार है ।

आलू के तले हुवे टुकड़ों मैं हरी चटनी , इमली की चटनी , चाट मसाला और नमक डाल कर अच्छी तरह मिक्स करे ।
चटपटी आलू चाट तैयार है

जन्म कुंडली व मानसिक रोग

स्वस्थ शरीर हो ख़ूब धन हो पर स्थिर मन ना हो तो यह सब व्यर्थ है । मन चंचल होता है हर समय कुछ ना कुछ विचार चलता ही रहता है । यह तब तक अच्छा है जब तक हमारी मानसिक शांति भंग ना हो और विचारों पर हमारा नियंत्रण हो । आज के इस आपा धापि के इस युग मैं मानसिक रोग बढ़ते ही चले जा रहे है , ज़रूरी नहीं कि वो पागलपन के लक्षण ही हो , मानसिक अवसाद व निराशा व अपराधबोध भी सभी मानसिक रोगों के प्रकार ही है ।
जन्म कुंडली मैं चंद्र , बुध , शनि व राहु की स्थिति को देख कर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ को जाना जा सकता है ।

चंद्रमा मन का कारक होता है , अगर जन्म कुंडली मैं चंद्रमा की स्थिति अच्छी नहीं है , शत्रु या नीच राशि का है , कम अंश का है और यदि बुध के साथ प्रतियुति कर रहा है तो ऐसा व्यक्ति जीवन मैं अवश्य मानसिक रोगों को शिकार होगा ।
चंद्र अगर राहु के साथ है तो ग्रहण योग बनता है इस स्थिति मैं जिससे मन की स्थिति अपने आप ही कमज़ोर हो जाती है ।
चंद्र के साथ अगर शनि की युती है तो विष योग बनता है ये योग व्यक्ति को प्रगति के शिखर तक पंहुचा सकता है पर इतनी अधिक मानसिक परेशानी देता है की आदमी कई बार जीवन को ख़त्म करने का प्रयास  कर सकता है ।
जन्म कुंडली मैं अगर चंद्र और बुध प्रतियुति मैं है और अस्टमेश है तो जातक जीवन मैं अवश्य ही भारी मानसिक आघातों को झेलेगा , बेहद निराशा से गुज़रेगा । जब कभी दशा मैं या गोचर मैं आएगा तब ये परेशनिया बहुत बढ़ सकती है ऐसे मैं परिवार का साथ और किसी की सलाह अवश्य ले ।
इसके लिए शिवजी की नियमित आराधना की जाए व लघु रूद्र का पाठ करे ।