International women's day

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया  जा रहा हैं ,यह ओपचारिकता क्यों ?अज जगह -जगह महिला सशक्तिकरण के भाषण होंगे ,कुछ महिलाओ का सम्मान होगा ,पर कल क्या ?वही routin ढाक के तीन  पात ।
एक ही दिन क्यों ? हर दिन हमारा हैं ,पुरे परिवार की धुरी हमारे इर्द गिर्द घुमती हैं ,जरुरत हैं तो स्वयं हमें अपनी शक्ति पहचानने की ,अपना सम्मान खुद करने की ।
स्वयम स्त्री ही जब अपनी सोच बदल लेगी ,अनुगामी न बन कर सहचर बनेगी ,second  सेक्स न रह कर एक  मुक्कमल औरत बनेगी तो न शोषण होगा न ही अपमान व् विवशता होगी ।
पुरुष हमसे श्रेष्ट्र नहीं बस हमसे अलग हैं ,परमेश्वर नहीं साथी हैं यह सोच हर महिला की अपनी सोच जब तक नहीं बनेगी बदलाव मुश्किल हैं ।
अन्याय व् अपमान न करो, न सहन करो यह सिख हम ही अपने बच्चो को दे सकते हैं तो बदलाव जरुर होगा ।
देह के परे भी   हमारा वजूद हैं ।

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