शरीफ़ सीताफल


         
आज सीताफल का भोग लगाते लगाते खयाल आया कि यह फल थोड़ा अलग है ,देखने मै ,खाने के तरीके मै ,और उस से भी ज्यादा नाम मै स्यापा है। एक तरफ तो शरीफा और दूसरी तरफ सीताफल। सीताफल और शरीफा नाम मै ही जेंडर चेंज हो गया।

हमे तो भाई सीताफल नाम ही पसंद है ,अब सीता मैय्या से इसका क्या कनेक्शन है ,यह मुझे नहीं मालूम है। किसी ने बताया कि इसको बंदर नहीं खाते इसलिए इसका नाम सीताफल हुआ ,पर रामफल बंदर खाते है क्या ?
नाम मै क्या रखा है ? हमे तो मीठे रसीले गुदेदार सीताफल बड़े पसंद है।

भारत के लगभग सभी गरम प्रदेशों में यह बहुतायत से पैदा होता है।हमारे मध्य प्रदेश के आस्टा के सीताफल बड़े ही मीठे रसीले होते है ,हमें तो हमारी मामीजी के पापा बस सीताफल के दिनों में बड़े याद आते है ,क्योंकि वो एक बार दो बड़े टोकरे भर के सीताफल लाए थे , इधर हमारे गुजरात मै तो देवगढ़ बारिया के सीताफल विदेशो तक अपनी मिठास पंहुचा रहे है।
हैदराबाद में तो पूरी एक सीताफल मंडी ही है।जब हम हैदराबाद गए तो ,जब पता लगा कि यहां तो सीताफल मंडी है तो ,पहुंच गए सीताफल खरीदने। वहां इतने सीताफल थे कि देख कर ही बोरा गए , आनन फानन दो टोकरे खरीद लाए ,कुछ पके हुवे पर अधिकांश कच्चे   थे।बचपन मै कभी किसी पेड़ पर सीताफल कच्चा दिखता तो तोड़ लेते थे ,और फिर गेंहू मै दबा देते थे ,भूलने पर सड़े हुवे गेहूं के साथ काला कलूटा सीताफल भी मिलता था ,उस से ज्यादा मिलती थी मम्मी की डांट।खेर ,हैदराबाद मै कच्चे सीताफल को पकाने का बड़ा आसान तरीका मालूम पड़ा कि ,अखबार मै लपेट कर रख दो ,एक दो दिन मै अपने आप ही पक जाएंगे।हमने भी घर पर आ कर टाइम्स ऑफ इंडिया मै सीताफलों को लपेट दिया। चंद्रा बाबू के फोटो के नीचे दूसरे दिन ही कई सीताफल पक गए ,तो मै और मेरी बिटिया ने दसियो सीताफल उदरस्थ कर लिए ,हा वो अलग स्टोरी है कि  इतने सीताफल एक दिन मै खाने पर हमारे पेट का क्या हाल हुआ होगा।

उधर दिल्ली की तरफ सीताफल कम ही मिलते है । वाकया यह हुआ कि बेटी की एक दोस्त दिल्ली की हमारे इधर आयी ,सीताफल का मौसम था ,तो बेटी ने उसे भी खाने के लिए दिया ,तो उसका पहला प्रश्न यही था कि इसे कहा से खाना शुरू करूं ? सचमुच सीताफल खाना भी एक कला है ,तो बस कुछ नहीं जी ,सीताफल लो उसे दो भागो मै बांटो ,बड़े छोटे हिस्से हो जाए तो कोई चिंता नहीं , कोन सा जायदाद का बंटवारा हो रहा है ,दोनों हिस्से हमें ही खाने है ।एक छोटी चम्मच ले लो,अरे वही जिस से आप हलवा खाते हो ,अब करीने से चम्मच को सीताफल के छिलके के अंदर वाले भाग से स्कूप की तरह निकाल कर  इस अमृत को मुंह में घुल जाने दो ,हा इस के पहले एक अखबार बिछा लो ,क्योंकि सीताफल मै कचरा बड़ा निकलता है ।भूल से भी बीज न निगल जाना ,वरना कुछ दिन मै सीताफल का पेड़ आप मै उग आएगा ।

सीताफल को फल की तरह ही खाने का अलग ही मजा है ,आजकल तो सीताफल रबड़ी ,सीताफल आइस क्रीम और भी कई चीजें बनने लगी है,ये भी मिलती है तो मजे से खा ही लेते है पर फल खाने का मजा अलग है।
इस मै केल्शियम,मैग्नीशियम ज़िंक, आयरन और भी कई मिनरल्स और विटामिन है जो मेंडेलीफ की पिरियोडिक टेबल से टेली कर सकते है।

तो लाओ ना खरीद कर सीताफल। पर अगर आप उत्तर प्रदेश मै है तो सीताफल मांगने पर आप को कद्दू मिलेगा । कद्दू को सीताफल कहना तो सीताफल की तौहीन है ,पर वही की नाम मै क्या रखा है , शराफ़त से शरीफा खरीद लाओ और इस के मीठे मक्खन का मजा लो।

और अगर आप के यहां के सीताफल प्रसिद्ध है अपनी मिठास के लिए तो एक टोकरा इधर भेजना न भूले ।

मेरी कलम से ✍️

उषा.....

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र

*ऋणमोचक मंगल स्तोत्र |*

यदि आपके ऊपर ऋण वा कर्ज का बोझ अधिक बढ़ गया है और आप उस कर्ज को चाह कर भी नहीं उतार पा रहे है तब यदि आप ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का नियमित पाठ करते है तो निश्चित ही धीरे धीरे आपका ऋण उतर जाएगा। जैसा की आप जानते है मंगल का सम्बन्ध हनुमानजी से है और हनुमानजी सर्वबाधामुक्ति प्रदाता है यह श्लोक भी हनुमान जी की ही आराधना के रूप में प्रतिष्ठित है।

*कैसे आरम्भ करे ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ*

इस पाठ को प्रारम्भ करने के लिए सर्वप्रथम आपको किसी शुभ तिथि का चयन भारतीय पञ्चाङ्गानुसार कर लेना चाहिए। यह पाठ मंगलवार को ही शुरू करना चाहिए अन्य दिन को नही। इस पाठ को करने से पूर्व लाल वस्त्र बिछाकर मंगल यन्त्र व महावीर हनुमान जी को स्थापित करना चाहिए , सिंदूर व चमेली के तेल का चोला अर्पित कर अपने बाये हाथ की तरफ देशी घी का दीप व दाहिने हाथ की तरफ तिल के तेल का दीप स्थापित करना चाहिए। इसके बाद हनुमान जी को गुड़, चने व बेसन का भोग लगाना चाहिए।
मंगल देव (मंगल यन्त्र को प्राण प्रतिष्ठित कर) व हनुमान जी के सामने ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ, लाल वस्त्र धारण कर के हीआरम्भ करना चाहिए। यह पाठ अपनी श्रद्धा अनुसार 1, 3, 5, 9 , अथवा 11 पाठ 43 दिन तक नित्य करना चाहिए | इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से निश्चित ही कर्ज, ऋण व आर्थिक बाधा से मुक्ति मिलती है |

*ऋणमोचक मंगल स्तोत्र*

मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।
स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1॥

लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2॥

अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3॥

एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्।
ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्॥4॥

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥5॥

स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः।
न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्॥6॥

अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।
त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय॥7॥

ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः।
भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा॥ 8 ||

अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः।
तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात्॥9॥

विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा।
तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः॥10॥

पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः।
ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः॥11॥

एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्।
महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा॥12॥

|| इति श्री ऋणमोचक मङ्गलस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ||

अलीगढ़


आओ फिर मोमबत्ती जलायें , मोमबत्ती जुलूस निकाले, वयस्था व प्रशासन को कोसे , सोशल साइट्स पर पोलिस को लानत भेजे। फिर AC मैं बेठ कर वीक एण्ड के प्लान बनाए।

क्यों हम ऐसे हो गए है , हमारी मेमोरी क्यू शॉर्ट टर्म हो गयी है ? जब भी कोई मासूम के साथ दरिंदगी की ख़बर सुनते है , तो हर माँ का कलेजा काँप जाता है , हम डरते सहमते है फिर अपने जीवन मैं रम जाते है?

किसी को बदला लेना है तो उस घर की औरत या बच्ची की इज़्ज़त तार तार कर दो , किसी की प्रतिस्ठा को हानि पहुँचानी हो तो उस घर की औरतों लड़कियों को बदनाम कर दो ।

कितना आसान है ना पुरुष वर्ग के लिए यह सब करना।

जहाँ लड़कियाँ बड़ी हुई हर तरफ़ से उपदेश मिलने लगते है , ठीक से बेठो , थीरे बोलो , ज़ोर से मत हँसो , अदब से रहो , पूरे तन को ढँके ऐसे कपड़े पहनो।

जब भी कोई पुरुष ऐसी कायरना वहशी हरकतें करते है तब लड़कियों के आचरण , उनकी पोशाखो पर , रहन सहन को ज़िम्मेदार बना दिया जाता है , ग़ोया की पैदा होते ही लड़की को साढ़े पाँच गज़ की साड़ी मैं लपेटने से पुरुष की लोलूपता पर लगाम लग जाएगी। कुल मिला कर कल्प्रिट भी हम और विक्टिम भी हम।

परसों अलीगढ़ मैं ढाई साल की बच्ची के साथ जो अमानवीय क्रत्य हुवा है , उस घटना के लिए शब्द नहीं है , आक्रोश है घुटन है ,  व्यवस्था के प्रति समाज के प्रति।

क्यों कोई माँ अपने बेटे को औरत जात का सम्मान करना नहीं सिखा पाती है , क्यों एक पिता अपने बेटों को सामाजिक ज़िम्मेदारियों को ठीक से निभाने की सिख नहीं दे पाता है ?

आओ हम भी एक मोमबत्ती जलाले , व्यवस्था को लानत भेजे , घड़ियलि आँसू बहा ले ,कुछ सेल्फ़ियाँ खिच ले , और घर जा कर वर्ल्ड कप क्रिकेट का मज़ा ले ।

मेरी क़लम से ✍️

उषा .......

अशेष स्मृतियाँ

रीयूनियन  सुनते  ही  दिल  मानो  बल्लियों  उछलने  लगता है,  time  travel  का जो अहसास है वो आप रियूनियन मैं जा कर बख़ूबी कर सकते हो। हालाँकि उम्र मैं हर साल एक नया अंक जुड़ता ही चला जा रहा है, पर मरें दिल को कोन समझायें जो अड़ियल सा अभी तक जवान ही बना बेठा है।

इधर साल दर साल चश्मों के लेंस मोटे होते चले जा रहे है, हर महीने कपड़े तंग हुवे जा रहे है, बालों मैं चाँदनी खिलती ही चली जा रही है , जिसे रंगने का हर पखवाड़े आयोजन करना पड़ता है, लेकिन जब कभी पुराने दोस्तों से बातें होती है तो लगता है मानो समय सोलह से बीस साल के बीच कही रुक गया है, बाक़ी बीते साल मानो यहाँ वहाँ कही कोने मैं पड़े हुवे से लगते है, क्यों की इन सालों की बेपरवाही रह रह के अंतस मैं पेठ बनाती हुई गाहे बगाहे बाहर निकल ही आती है।
                 

उन दिनो की यादों मैं मम्मी पापा, भाई बहन और बस दोस्त ही होते है , जो यादों की हर खिड़की मैं इत उत से झाँकते रहते है। अनगिनत यादें दोस्तों के इर्द गिर्द ही घूमती है,सपने रंगीन हो या श्वेत श्याम, फ़्रेम मैं दोस्त आ ही जाते है। उषा चाय बनाओ , या मम्मा खाना लगाओ के साथ पलक झपकते वर्तमान मैं धकेल देते है।

इस उम्र मैं आ कर लगता है , मानो सब फिसलने लगा है , और हम मुट्ठी कस के हर एक पल को पकड़ना चाह रहे है। अतीत की जुगाली मानव मन का सबसे प्रिय शग़ल है , समय की अनंत धारा मैं हम आगे पीछे बहते ही रहते है।

आजकल हम ज़्यादा कुछ कह नहीं सकते इसलिए लिखना ही बेहतर है।
जब भी बात निकलती है यादों की ,मेरे खयाल से वो इंसान ही अपको याद रहेंगे क्यो कि वो कुछ छोड़ गए आपमें; कुछ अधपका सा। कुछ बनते बनते रह सा गया। कुछ ऐसा, जिसकी नींव पड़ चुकी थी मगर मक़ान का पूरा खाका अभी तैयार नहीं हुआ था । ऐसी अधूरी तथा अव्यक्त चीज इंसान हमेशा याद करता है। एक कसक बनी ही रहती है। एक “काश” घर कर ही लेता है, जब कुछ अनकहा, कुछ अव्यक्त ज़हन में रह जाता है | ये अनकही इच्छा एक नदी की तरह निरंतर बहती रहती है क्यों कि इसको अपना सागर नहीं मिला| वो सागर किसी का भी हो सकता है, वो बचपन की पाक दोस्ती हो ,वो प्रेम का सुखद शांत सा सागर हो सकता है , वो नफरत का तूफ़ान में उमड़ता हुआ सागर भी हो सकता या फिर मोहभंग का रूखा सागर भी हो सकता है |

ज़िदगी कितने ही मुक़ाम तय कर चुकी,

दिल जहाँ ठहरा था ठहरा रह गया|

और ये अधूरी अधजन्मीं इच्छाएं रह रह कर बहुत ही धीमे से कुरेद कर चली जाती है | और जो दर्द उठता है वो इतना भी ज्यादा नहीं होता की किसी से कहा जाये या चेहरे पर दिख जाये और इतना कम भी नहीं होता कि हम महसूस ही न करे।

कह इसलिए नहीं सकते क्योंकि अब सुनने वाले वो दोस्त नहीं रहे। जी नहीं कमबख़्त दुनियाँ से नहीं चले गए, बस अपने-अपने जीवन में सब इतना व्यस्त हो गए हैं कि एक दूसरे से बात करने की फुर्सत ही नहीं है।

पहले जहां 24 में से 12 घण्टे एक दूसरे के साथ बिताते थे, अब 12 महीने में कुलजमा 12 बार भी बात नहीं हो पाती।

अँगूर के गुच्छे की तरह जो दोस्त साथ-साथ रहा करते थे, अब वो अँगूर के दाने पूरी दुनियां में बिखर गए हैं।

ज़िन्दगी के दबाव के कारण पिचक कर लगभग सभी अँगूरों की वाइन बन गयी है। लेकिन कहते हैं वाइन जितनी पुरानी हो जाये उतनी ही महँगी हो जाती है।

तो उस दोस्ती का मूल्य अब वाइन के पुराने हो जाने पर समझ आ रहा है। वो बेफिक्री शरारतें, वो बेहिसाब बेमतलब फज़ूल की बातें, बिना बात के घण्टों हंसना।अब ये सब किसके साथ करें, ना ही वो दोस्त हैं और न ही उतना समय।

तो मेरे छोटे दोस्तों, जो अभी स्कूल या कॉलेज में हैं। जी भरकर ये सारे लम्हे जी लो। जब हम ये लम्हे जी रहे होते हैं तब इनकी अहमियत समझ नहीं आती। एक बार जब ये सुनहरा समय बीत जाता है, तब इनका मूल्य पता लगता है।

शाहरुख खान के सुंदर भक्ति गीत में यही सिखाया गया है : "हर पल यहां; जी भर जीयो, ये दास्तां कल हो न हो।

मेरी क़लम से ✍️
अशेष स्मृतियाँ
उषा....

सोने मैं निवेश

हम भारतीय लोगों के लिए सोने के प्रति प्रेम पुरातन काल से चला आ रहा है, हर भारतीय विशेष कर महिलाओं मैं इसके प्रति विशेष लगाव होता है , और हर महिला के पास कम से कम एक स्वर्ण आभूषण ज़रूर होता है।

वर्तमान समय मैं दोनो बहुमूल्य धातुओं मैं बहुत तेज़ी है , उतार चढ़ाव भी काफ़ी दिख रहा है।
ज्ञात सभ्यता से ही स्वर्ण को सम्पन्नता का प्रतीक माना गया है , पीढ़ियों से स्वर्ण मैं निवेश परिवारों मैं व सरकारें ख़ुद स्वर्ण का भंडारण करती आयी है, सदियों से इसे अमूल्य धातु माना गया है , तो इसमै निवेश हमेशा ही सुरक्षित रहेगा , कभी भी बुलबुले की तरह नहीं होगा , पहले हमारे देश व अन्य देशों मैं राष्ट्रीय स्तर पर इसके दाम निर्धारित होते थे , लेकिन पिछले कुछ सालों से स्वर्ण के दाम अंतर्रष्ट्रिय स्तर पर निर्धारित होते है।
वर्तमान मैं स्वर्ण रिकार्ड ऊँचाई पर है ,पिछले तीन सालों मैं तीस से तेंतिस हज़ार प्रति दस ग्राम के हिसाब से ही दाम चल रहा है, अगले पाँच सालों मैं भी इसमै ख़ास बढ़ोतरी की सम्भावना नहीं है।
सिर्फ़ निवेश की द्रस्टी से व बहुत अधिक रिटर्न की इच्छा से इसमै निवेश लाभकारी नहीं है , लेकिन फिर भी स्वर्ण मैं निवेश ज़रूर करे , क्योंकि यही वो धातु है जिसे तुरंत बेचा जा सकता है , थोड़े बहुत लाभ हानि के साथ , मुसीबत के समय सबसे भरोसेमंद निवेश यही होता है
भारतीय समाज के मानको के हिसाब से एक सामान्य भारतीय परिवार का जो महीने का ख़र्च होता है , वो दस ग्राम सोने के बराबर होता है। यह बिलकुल सत्य है , पिछले सालों के सोने के दाम और मासिक ख़र्च की तुलना करे बिलकुल बराबर होता है।
सोने मैं निवेश , शुद्ध स्वर्ण , ETF , गोल्ड बॉंड या आभूषण के रूप मैं भले ही थोड़ा करे पर अवश्य करे।

क़ाठियावाड़ी भरवाँ बेंगन


बेंगन  भारत ही नहीं विश्व के कई देशों मैं उगाया और खाया जाता है। भारत मैं ही इसकी 35 से अधिक प्रकार की खेती की जाती है, और गुजरात एक ऐसा राज्य है जहाँ सबसे ज़्यादा बेंगन की खपत होती है। कई आकार प्रकार के बेंगन मिलते है, गोल., लम्बे, हरे,चितकबरे, भर्ता बेंगन और भी कई प्रकार के मिलते है, उसी तरह बनाने के भी कई तरीक़े है। क़ाठियावाड़ी खाने मैं बेंगन का भर्ता मुख्य होता है, वैसे ही लम्बे बेंगन की सब्ज़ी भी अलग तरह से बनायी जाती है , गरम बाजरे की रोटी के साथ परोसी जाती है।

आवश्यक सामग्री

बेंगन लम्बे वाले 250 gm

कटा हरा धनिया आधी गड्डी

लहसुन की 15 कलियाँ

हरा लहसुन

लाल मिर्च पाउडर

हल्दी पाउडर

धनिया पाउडर

नमक स्वादानुसार

तेल एक बड़ा चम्मच

बनाने की विधि

बेंगन को धो कर , ढंखल निकाल दे , लम्बाई मैं चिरा लगाए।

हरा धनिया , हरा लहसुन , बिलकुल बारीक काट ले , लहसुन की कलियों को हल्का से पिस ले, इसी मैं , मिर्च , हल्दी , नमक , धनिया पाउडर मिला कर , आधा छोटा चम्मच तेल मिला कर , बेंगन मैं भर दे। पंद्रह मिनट रखा रहने दे। बड़े टुकड़ों मैं काट ले।

कढाही मैं तेल डाले, गरम होने पर , बेंगन के टुकड़े डाल दे , मंद आँच पर पकने दे, बीच बीच मैं हिलाते रहे। पंद्रह से बीस मिनट मैं अच्छे गल जाएँगे। बाजरे की रोटी के साथ गरमा गरम परोसे, साथ मैं गुड़ और छाश रखे।

हस्तरेखा व प्रेम

हस्त रेखा और प्रेम



सामुद्रिक शास्त्र के अंतर्गत हाथों की लकीरों से भविष्य कथन की प्राचीन परम्परा है। जिन व्यक्तियों को जन्म विवरण जैसे समय तारीख़ मालूम नहीं हो, उनके लिए हस्त रेखा (palmistry) का अध्ययन कर सटीक भविष्य कथन किया जा सकता है। जीवन के हर पहलू के बारे मैं जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जीवन मैं किस तरह के सम्बंध रहेंगे, प्यार, विवाह परिवार के बारे मैं जानकारी प्राप्त करने के लिए हथेली मैं स्थित मुख्य रूप से शुक्र पर्वत की स्थिति , ह्रदय रेखा विवाह रेखा का अध्ययन किया जाता है।

अंगूठे के नीचे शुक्र का क्षेत्र , शुक्र पर्वत कहलाता है, अगर यह भाग उभरा हुवा है, और अंगूठे का पहला पर्व मस्तिष्क रेखा लम्बी बगेर काँट छाँट के हो तो व्यक्ति प्रेम समबंधो मैं ईमानदार संयमी होगा।

किसी भी स्त्री पुरुष के दाँए हाथ मैं ह्रदय रेखा गुरु पर्वत ( तर्जनी के नीचे का भाग ) तक सीधी जाती हो , शुक्र पर्वत उभरा हुवा हो तो ऐसे व्यक्ति अच्छे उदार प्रेमी साबित होते है।

अगर हथेली मैं शुक्र पर्वत बहुत ज़्यादा उभरा हुवा हो , साथ ही निम्न मंगल भी उभरा हो तो ऐसे व्यक्ति का झुकाव प्रेम से अधिक वासना की और होता है। ऐसे व्यक्तियों को जीवन मैं कई बार भावनाओं के कारण अति प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।( व्याभिचार के मामलों मैं लिप्त लोगों की हथेली मैं यह देखा जा सकता है )

हथेली मैं विवाह रेखा जो सबसे छोटी अंगुली के नीचे आड़ी रेखाए होती है , अगर ये एक से अधिक है तो , ऐसे लोगों के जीवन मैं एक से अधिक प्रेम सम्बंध होते है।


जिस व्यक्ति के हाथ मैं विवाह रेखा लम्बी , सूर्य पर्वत तक जाती हो ( अनामिका अंगुली के नीचे सूर्य पर्वत होता है) , इन व्यक्तीयो का प्रेम सम्बंध सम्पन्न व  प्रामाणिक लोगों के साथ होता है।

हद्रय रेखा से कोई रेखा निकल कर शनि पर्वत ( मध्यमा अंगुली के नीचे ) तक जाती हो , तो ऐसे व्यक्तीयो का प्रेम समबंधो से बहुत जल्दी ही मोहभंग हो जाता है , यह रेखा कई सन्यासीयो के हाथ मैं देखी जा सकती है।

दोनो ही हाथो मैं यदि विवाह रेखा समान लम्बाई वालीव् स्वस्थ  हो तो ऐसे व्यक्तीयो को सम्पूर्ण जीवन सुखद प्रेम समबंधो की अनुभूति होती है।

फ़ोटो गूगल से साभार।

ज्योतिषाचार्य

उषा जैन भटनागर 

प्यार और ज्योतिषिय द्रष्टिकोण





मौसम बसंत का है साथ ही valentine day आने वाला है तो ज्योतिष के माध्यम से भी प्यार की बात की जाए
प्यार मैं अधिकांश लोगों को असफलता ही हाथ लगती है बहुत ही कम भाग्यशाली लोगों को सफलता मिलती है
जन्म कुंडली मैं बहुत ही स्पस्ट संकेत होते है की आपको सफलता मिलेगी या निराशा हाथ लगेगी।

कुंडली मैं प्रेम के लिए दो ग्रह ज़िम्मेदार है एक चंद्र और दूसरा शुक्र चंद्र मन का कारक और शुक्र ह्रदय की धड़कन।

तीसरा ग्रह मंगल उसका मज़बूत होना बेहद ज़रूरी है तभी प्यार के लिए कुछ कर गुज़रने का साहस मिलेगा

जिन जातकों की कुंडली मैं मंगल शुक्र की व्रषभ राशि या तुला राशि मैं हो या शुक्र मंगल की मेष राशि या व्रस्चिक राशि मैं हो या जातक की तुला या व्रषभ राशि हो इन लोगों के जीवन मैं प्रेम निस्चित रूप से आता है
 अर्थात् कुंडली मैं मंगल के आगे   2.  या  7 लिखा हो या शुक्र के आगे 1  या 8 लिखा हो या चंद्र के आगे 2.  या 7 लिखा हो।

शुक्र मंगल की युती मैग्नेटिक होती है ,व्रषभ या तुला राशि के जातकों मैं ग़ज़ब का आकर्षण होता है इन लोगों का प्रेम मैं पड़ना निस्चित है।

कुंडली मैं शुक्र मंगल की युती हो शुक्र चंद्र साथ हो या शुक्र पर मंगल की दृष्टि हो तो तय मानिए जीवन मैं प्रेम की बसंत बहार आना निस्चित है

फ़ोटो गूगल से साभार 

ब्लॉगर 
उषा जैन भटनागर